डेस्क: प्रेग्नेंसी हर महिला के लिए एक खूबसूरत और खास एहसास होता है। इस दौरान जहां एक तरफ मां बनने की खुशी होती है, वहीं दूसरी तरफ अपनी और होने वाले बच्चे की सेहत को लेकर कई तरह की चिंताएं भी रहती हैं। हर महिला चाहती है कि उसकी प्रेग्नेंसी हेल्दी रहे और डिलीवरी के समय किसी तरह की परेशानी न आए। यही वजह है कि गर्भावस्था के दौरान महिलाएं अपने खानपान से लेकर रोजाना की दिनचर्या तक का खास ध्यान रखती हैं। इस दौरान शरीर को एक्टिव रखने के लिए योग भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। सही तरीके से और डॉक्टर की सलाह लेकर किए गए कुछ आसान योगासन कमर दर्द, मांसपेशियों की अकड़न और मानसिक तनाव को कम करने में मदद कर सकते हैं। साथ ही शरीर को डिलीवरी के लिए तैयार करने में भी सहायक हो सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे 5 योगासन, जिन्हें डॉक्टर की अनुमति मिलने पर प्रेग्नेंसी रूटीन में शामिल किया जा सकता है।
तितली आसन (Butterfly Pose)
प्रेग्नेंसी के दौरान तितली आसन काफी फायदेमंद माना जाता है। इसे बद्ध कोणासन भी कहते हैं। इस आसन में जांघों और कूल्हों के आसपास की मांसपेशियों में हल्का खिंचाव आता है, जिससे शरीर का लचीलापन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
कैसे करें?
सबसे पहले जमीन पर योग मैट बिछाकर आराम से बैठ जाएं। अब दोनों पैरों के तलवों को आपस में मिला लें। दोनों हाथों से पैरों को पकड़ें और घुटनों को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करें। इस दौरान अपनी पीठ सीधी रखें और सांस सामान्य रूप से लेते रहें। अपनी सुविधा के अनुसार कुछ देर तक इस स्थिति में रहें। ध्यान रखें कि घुटनों को जबरदस्ती नीचे न दबाएं और पैरों को पेट के बहुत पास खींचने की कोशिश न करें।
मार्जरी आसन (Cat-Cow Pose)
प्रेग्नेंसी में वजन बढ़ने और शरीर में होने वाले बदलावों के कारण कई महिलाओं को कमर और पीठ में दर्द या अकड़न की शिकायत होने लगती है। ऐसे में मार्जरी आसन हल्का मूवमेंट देने और रीढ़ की हड्डी का लचीलापन बनाए रखने में मदद कर सकता है।
कैसे करें?
सबसे पहले योग मैट पर दोनों हथेलियों और घुटनों के सहारे आ जाएं। दोनों हाथ कंधों के ठीक नीचे और घुटने कूल्हों के नीचे रखें। अब सांस अंदर लेते हुए पीठ को हल्का नीचे की तरफ करें और गर्दन को आरामदायक स्थिति में रखें। इसके बाद सांस छोड़ते हुए पीठ को धीरे-धीरे ऊपर की ओर गोल करें। इस प्रक्रिया को बिना जल्दबाजी किए अपनी सुविधा के अनुसार दोहराएं। इस आसन को करते समय पेट पर दबाव न डालें। किसी भी तरह की परेशानी होने पर तुरंत रुक जाएं।
ताड़ासन (Mountain Pose)
ताड़ासन शरीर की मुद्रा यानी पोस्चर को बेहतर बनाए रखने और संतुलन बनाने में मदद करता है। प्रेग्नेंसी के दौरान जैसे-जैसे पेट का आकार बढ़ता है, वैसे-वैसे शरीर का संतुलन भी बदलने लगता है। ऐसे में यह आसन शरीर को सीधा रखने और सही पोस्चर पर ध्यान देने में मदद कर सकता है।
कैसे करें?
सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों के बीच थोड़ा अंतर रखें। अब धीरे-धीरे दोनों हाथों को ऊपर की तरफ उठाएं। अपनी पीठ को सीधा रखें और शरीर को आरामदायक स्थिति में रखें। सामान्य रूप से सांस लेते हुए कुछ सेकंड इसी अवस्था में रहें। इसके बाद धीरे-धीरे हाथों को नीचे ले आएं। प्रेग्नेंसी में संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है, इसलिए इस आसन को दीवार या किसी मजबूत सहारे के पास ही करें। अगर चक्कर आने या असहज महसूस होने की समस्या हो तो इसे न करें।
वज्रासन (Vajrasana)
वज्रासन एक आसान योगासन है, जिसमें घुटनों को मोड़कर एड़ियों के ऊपर बैठा जाता है। इसमें पीठ सीधी रखी जाती है और दोनों हाथ घुटनों पर होते हैं। हालांकि, प्रेग्नेंसी के दौरान पेट का आकार बढ़ने के कारण कई महिलाओं को इस स्थिति में बैठने में परेशानी हो सकती है।
कैसे करें?
सबसे पहले योग मैट पर घुटनों के बल बैठ जाएं। अब धीरे-धीरे कूल्हों को एड़ियों की तरफ ले जाएं। दोनों हाथों को घुटनों पर रखें और पीठ सीधी रखने की कोशिश करें। सामान्य रूप से सांस लेते रहें और उतनी ही देर बैठें, जितना आरामदायक लगे। इस आसन को गर्भावस्था में तभी करें, जब डॉक्टर इसकी अनुमति दें। घुटनों, पेट या कमर पर दबाव महसूस होने पर इसे करने से बचें। जरूरत पड़ने पर कुशन का सहारा लिया जा सकता है।
भ्रामरी प्राणायाम (Bhramari Pranayama)
प्रेग्नेंसी में हार्मोनल बदलावों के कारण कई महिलाओं को बेचैनी, तनाव और नींद से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। ऐसे में भ्रामरी प्राणायाम मन को शांत करने और तनाव कम करने में मदद कर सकता है। इस प्राणायाम में सांस छोड़ते समय मधुमक्खी जैसी गुनगुनाहट की आवाज निकाली जाती है।
कैसे करें?
सबसे पहले किसी शांत जगह पर आरामदायक स्थिति में बैठ जाएं। अब आंखें बंद करके शरीर को ढीला छोड़ दें। नाक से धीरे-धीरे सांस अंदर लें। सांस छोड़ते समय मुंह बंद रखें और मधुमक्खी जैसी हल्की गुनगुनाहट करें। इस प्रक्रिया को अपनी सुविधा के अनुसार कुछ बार दोहराएं। इस दौरान सांस रोकने या शरीर पर किसी तरह का दबाव डालने की जरूरत नहीं है। अगर चक्कर या घबराहट महसूस हो तो तुरंत रुक जाएं।
प्रेग्नेंसी में योग करते समय इन बातों का रखें ध्यान
गर्भावस्था के दौरान योग करना फायदेमंद हो सकता है, लेकिन हर महिला की प्रेग्नेंसी एक जैसी नहीं होती। इसलिए किसी भी योगासन को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य प्रीनेटल योग एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। योग हमेशा आरामदायक कपड़े पहनकर और हवादार जगह पर करें। शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डालें। पेट के बल लेटने वाले और पेट पर दबाव डालने वाले आसनों से बचें। लंबे समय तक पीठ के बल लेटकर एक्सरसाइज न करें, खासकर प्रेग्नेंसी के बाद के महीनों में। गर्म वातावरण में कठिन योग या हॉट योग करने से बचें। दर्द, चक्कर, सांस लेने में परेशानी, ब्लीडिंग या असामान्य बेचैनी होने पर तुरंत योग करना बंद करें और डॉक्टर से संपर्क करें।
क्या योग से नॉर्मल डिलीवरी हो सकती है
योग करने से नॉर्मल डिलीवरी की गारंटी नहीं मिलती, लेकिन गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित शारीरिक गतिविधियां शरीर को स्वस्थ और एक्टिव रखने में मदद कर सकती हैं। डिलीवरी नॉर्मल होगी या सी-सेक्शन से, यह मां और बच्चे की सेहत, गर्भावस्था की स्थिति और डिलीवरी के समय की मेडिकल परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए सिर्फ नॉर्मल डिलीवरी की उम्मीद में शरीर पर दबाव डालना सही नहीं है। मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है।


