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BJP विधायक की बढ़ी मुश्किलें, चुनावी हलफनामें में आपराधिक मामला छिपाने के आरोप

डेस्क: मध्यप्रदेश के कटनी जिले में बड़वारा विधानसभा से पहली बार विधायक बने भाजपा के धीरेंद्र बहादुर सिंह पर चुनाव आयोग को गलत जानकारी देने का मामला सामने आया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने नामांकन पत्र में चुनाव आयोग को गलत जानकारी दी है। चुनाव आयोग को उन्होंने अपने विरुद्ध दर्ज आपराधिक प्रकरण का उल्लेख शपथ पत्र में नहीं किया था, जिसका खुलासा सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी से हुआ है। इस मामले में उन पर बडवारा थाने में मामला दर्ज किये जाने की बात सामने आई है।

जिले के बड़वारा विधानसभा से भाजपा ने धीरेंद्र बहादुर सिंह को अपना प्रत्याशी मैदान में उतारा था। यह विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति जाति के लिए आरक्षित है। बड़वारा विधानसभा प्रत्याशी धीरेंद्र बहादुर सिंह पर आरोप है कि उन्होंने अपने निर्वाचन के नामांकन पत्र पर अपने अपराधिक प्रकरण का उल्लेख नहीं किया है। चुनाव के समय दिए गए हलफनामा में धीरेंद्र बहादुर सिंह ने अपने विरुद्ध किसी प्रकार का कोई अपराधिक प्रकरण दर्ज न होने शपथ पत्र में जानकारी दी थी, लेकिन अब विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं और सदस्यता शून्य हो सकती है।
आरटीआई एक्टिविस्ट राघवेंद्र सिंह ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी से खुलासा किया है कि धीरेंद्र बहादुर सिंह ने अपने अपराधिक रिकार्ड की जानकारी छुपाई है।थाना बड़वारा ने लिखित जानकारी देते हुए बताया है कि धीरेंद्र बहादुर सिंह पिता स्वर्गीय रणधीर सिंह के विरुद्ध अपराध क्रमांक 99/2000 धारा 448.324.325 और 506 भादवि के तहत दर्ज है।
राघवेंद्र सिंह का आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर अपने शपथ पत्र में अपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी नहीं दी है । इसकी शिकायत मुख्य चुनाव आयुक्त सहित जिला निर्वाचन अधिकारी/कलेक्टर को ईमेल के माध्यम से की गई है। शिकायत में बड़वारा विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह की सदस्यता खत्म करने की मांग की गई है। इस संबंध में जब वर्तमान बड़वारा विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह का पक्ष जानने उनसे फोन पर संपर्क करना चाहा तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। निर्वाचन आयोग द्वारा समय रहते कार्रवाई की जाती है तो धीरेंद्र बहादुर सिंह खतरे में पड़ सकते हैं।
अक्टूबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि यदि कोई उम्मीदवार हलफनामे में गलत जानकारी देता है या आपराधिक मामले छिपाता है, तो कोई भी आम नागरिक (मतदाता) उसके खिलाफ सीधे कोर्ट में आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके लिए चुनाव आयोग की मंजूरी या सरकारी अधिकारी की शिकायत का इंतजार करने की जरूरत नहीं है।

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