डेस्क: महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने दिग्गज फार्मा कंपनी सिप्ला पर सख्त कार्रवाई करते हुए पुणे स्थित उसके एक बड़े वेयरहाउस का बिक्री और वितरण लाइसेंस पूरी तरह से रद्द कर दिया है। यह कदम दवाओं के सही रखरखाव, पैकेजिंग, रिकॉर्ड में गड़बड़ी और एक्सपायर हो चुकी दवाओं को संभालने में लापरवाही बरतने के कारण उठाया गया है।
कोर्ट के निर्देश के बाद 1 अक्टूबर को जारी हुआ अंतिम आदेश
यह पूरा मामला पुणे के वाडकी इलाके में स्थित सिप्ला के ‘कैरीइंग एंड फॉरवर्डिंग’ (C&F) वेयरहाउस से जुड़ा है। बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के तहत FDA ने मामले की समीक्षा की। प्रक्रिया को पूरा करते हुए रेगुलेटर ने पुरानी कार्यवाही को वापस लेकर नया ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी किया और फिर 1 अक्टूबर को लाइसेंस रद्द करने का अंतिम फैसला सुनाया।
क्या है ‘रिएक्टिन प्लस’ विवाद?
यह मामला आंशिक रूप से ‘रिएक्टिन प्लस’ (Reactin Plus) पर केंद्रित है, जो ‘शेड्यूल H’ के तहत डॉक्टर की सलाह पर मिलने वाली दवा है और इसे बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं बेचा जा सकता। जून में हुई जांच के दौरान, FDA अधिकारियों को ऐसी पैकेजिंग मिली जिस पर “एनाल्जेसिक और एंटीपायरेटिक” (दर्द और बुखार कम करने वाली दवा) लिखा था। साथ ही, इसमें सिरदर्द, मांसपेशियों का दर्द, पीठ दर्द, जोड़ों का दर्द, मोच, शरीर का दर्द और दांत दर्द जैसी समस्याओं से तुरंत राहत का दावा भी किया गया था। रेगुलेटर ने डॉक्टर की सलाह पर मिलने वाली दवा के लिए इन दावों को नियमों के खिलाफ माना। रेगुलेटरी कार्रवाई की रिपोर्ट के अनुसार, FDA ने पहले लगभग 11.2 लाख रुपये कीमत का ‘रिएक्टिन प्लस’ स्टॉक ज़ब्त किया था और इसे वापस मंगाने (रिकॉल) का निर्देश दिया था।
जांच में प्रोडक्ट की पैकेजिंग के अलावा वेयरहाउस में अन्य समस्याएं भी सामने आईं। FDA अधिकारियों ने पाया कि दवा के डिब्बे सीधे फ़र्श पर रखे गए थे और वहां धूल जमा थी। उन्होंने यह भी कहा कि सुविधा केंद्र में अनिवार्य ‘इंस्पेक्शन बुक’ (निरीक्षण पुस्तिका) नहीं थी। आरोप है कि एक्सपायर हो चुकी दवाओं को “बिक्री के लिए नहीं” (Not for Sale) वाले तय हिस्से में अलग नहीं रखा गया था।
रेगुलेटर को फ़िज़िकल स्टॉक और कंप्यूटर पर रखे रिकॉर्ड के बीच भी अंतर मिला, जिसमें एंटीबायोटिक्स जैसी दवाएं भी शामिल थीं। FDA ने कंपनी की इस दलील को खारिज कर दिया कि उसका डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग नियमों के मुताबिक था। FDA ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड अनिवार्य फ़िज़िकल जांच, साफ़-सफ़ाई के मानकों और कानूनी दस्तावेज़ों की जगह नहीं ले सकते।
FDA ने कहा कि यह कार्रवाई सिप्ला के जवाब पर विचार करने और विस्तृत सुनवाई प्रक्रिया के बाद की गई। महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने कहा कि इसका मकसद दवा सप्लाई चेन में सुरक्षा, गुणवत्ता और कानूनी नियमों का पालन सुनिश्चित करना था।
हालांकि, सिप्ला ने इस कार्रवाई का विरोध किया है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि वह “क्वालिटी और मरीज़ों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध” है और उसने अपनी वाडकी C&F सुविधा के बारे में FDA के फ़ैसले को निराशाजनक बताया। कंपनी ने कहा कि सिप्ला का मानना है कि पुणे C&F वेयरहाउस डिस्ट्रीब्यूशन और स्टोरेज प्रोटोकॉल के साथ-साथ डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग स्टैंडर्ड्स के अनुसार काम करता है। उसने आगे कहा कि वह आदेश की समीक्षा कर रही है और आगे के विकल्पों पर विचार कर रही है।
सिप्ला ने यह भी कहा कि वह मरीज़ों और हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स के लिए सुरक्षित और अच्छी क्वालिटी वाली दवाएं बिना किसी रुकावट के उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। यह रेगुलेटरी कार्रवाई पुणे C&F सुविधा के लाइसेंस और वहां पाई गई कमियों से जुड़ी है। सिप्ला का कहना है कि इस मामले में और समीक्षा की ज़रूरत है और वह FDA के आदेश के ख़िलाफ़ अपने विकल्पों पर विचार कर रही है।


