डेस्क: 46वें फीडे शतरंज ओलंपियाड में भले ही भारत किसी भी वर्ग में स्वर्ण पदक नहीं जीत पाया – पुरुष टीम को रजत और महिला टीम को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा – लेकिन टूर्नामेंट के समापन पर भारत को एक बेहद खास सम्मान से नवाजा गया। ओपन (पुरुष) और महिला दोनों वर्गों में मिलाकर सबसे बेहतरीन संयुक्त प्रदर्शन करने वाले देश को दिया जाने वाला नाना गैप्रिंडाश्विली कप भारत को लगातार तीसरी बार मिला है।
यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि भारत पिछले तीन ओलंपियाड – 2022 चेन्नई, 2024 बुडापेस्ट और अब 2026 समरकंद – में एकमात्र ऐसा देश रहा है जिसने दोनों वर्गों में पदक जीते हों। 2024 बुडापेस्ट में भारत ने ऐतिहासिक दोहरा स्वर्ण जीता था, जबकि इस बार समरकंद में पुरुष टीम ने रजत और महिला टीम ने कांस्य पदक अपने नाम किया। किसी अन्य देश की न तो पुरुष और न ही महिला टीम लगातार तीनों ओलंपियाड में दोनों वर्गों में एक साथ पदक की दौड़ में बनी रह सकी, जिसके चलते भारत को यह सम्मान लगातार तीसरी बार दिया गया।
नाना गैप्रिंडाश्विली कप जॉर्जिया की दिग्गज पूर्व महिला विश्व चैंपियन नाना गैप्रिंडाश्विली के नाम पर दिया जाता है, और यह फीडे द्वारा ओलंपियाड में सर्वश्रेष्ठ संयुक्त (पुरुष व महिला) प्रदर्शन करने वाले देश को प्रदान किया जाने वाला प्रतिष्ठित सम्मान है। यह ट्रॉफी भारतीय शतरंज के लिए किसी एक टूर्नामेंट की सफलता भर नहीं, बल्कि बीते चार वर्षों में हुए समग्र उभार का प्रमाण है, जिसमें दोनों वर्गों में टीम की गहराई और निरंतरता साफ झलकती है।
गुकेश डी, प्रज्ञानानंद आर, हम्पी कोनेरू, दिव्या देशमुख समेत भारत के कई खिलाड़ियों को मिले व्यक्तिगत बोर्ड पुरस्कारों के साथ-साथ यह टीम सम्मान भी भारतीय शतरंज के लगातार मजबूत होते कद को दर्शाता है। भले ही समरकंद में भारत स्वर्ण पदक से चूक गया हो, लेकिन नाना गैप्रिंडाश्विली कप पर लगातार तीसरी बार कब्जा यह साबित करता है कि विश्व शतरंज में भारत की मजबूत पकड़ अब लगातार बनी हुई है।


