डेस्क: जम्मू-कश्मीर के लिए एक बार फिर गौरव का क्षण है। सांबा जिले के गांव बढ़ोढ़ी के रहने वाले और देश के जाने-माने पर्वतारोही कर्नल रणवीर सिंह जम्वाल को लद्दाख में 20 चोटियों के ऐतिहासिक प्रथम आरोहण के लिए माननीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने सम्मानित किया।
कर्नल रणवीर सिंह जम्वाल के नेतृत्व में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड एडवेंचर स्पोर्ट्स (NIMAS) की टीम ने लद्दाख में 6,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली 20 ऐसी चोटियों का प्रथम रिकॉर्डेड आरोहण किया, जिन पर इससे पहले कोई दर्ज आरोहण नहीं हुआ था। यह उपलब्धि मात्र 23 दिनों में हासिल की गई। अभियान को माननीय रक्षा मंत्री ने नई दिल्ली में फ्लैग इन किया और पूरी टीम के प्रयासों की सराहना की।
23 वर्षों से अधिक के अपने पर्वतारोहण करियर में कर्नल जम्वाल ने 3 विश्व रिकॉर्ड, 2 एशियाई रिकॉर्ड और 4 भारतीय रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। वह माउंट एवरेस्ट को तीन बार तथा माउंट कंचनजंघा को सफलतापूर्वक चढ़ाई कर चुके हैं।
कर्नल जम्वाल विश्व के एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों तथा भारत के सभी 28 राज्यों के सर्वोच्च बिंदुओं पर आरोहण किया है।
जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष गौरव की बात यह भी है कि कर्नल जम्वाल प्रतिष्ठित तेनजिंग नॉर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार प्राप्त करने वाले जम्मू-कश्मीर के एकमात्र व्यक्ति हैं। यह भारत का सर्वोच्च राष्ट्रीय साहसिक खेल सम्मान है, जिसे साहसिक खेलों के क्षेत्र में अर्जुन पुरस्कार के समकक्ष माना जाता है।
सम्मान मिलने पर कर्नल जम्वाल ने कहा, “माननीय रक्षा मंत्री द्वारा पूरी टीम के प्रयासों को सम्मानित किया जाना मेरे लिए बेहद गौरव और विनम्रता का क्षण है। जम्मू की मिट्टी से निकलकर जब भी मैं किसी पर्वत पर जाता हूं, अपने साथ अपने गृह प्रदेश का गौरव लेकर जाता हूं। यह उपलब्धि केवल मेरी नहीं, बल्कि पूरी टीम, हमारे परिवारों, मार्गदर्शकों और उन सभी लोगों की है जिन्होंने इस यात्रा में हमारा साथ दिया।”
उन्होंने कहा कि पर्वतारोहण ने उन्हें अनुशासन, धैर्य, विनम्रता, टीम भावना और जिम्मेदारी का महत्व सिखाया है और वह चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर के अधिक से अधिक युवा साहसिक खेलों से जुड़ें, फिट रहें और अपनी क्षमताओं को पहचानें।
यह उपलब्धि कर्नल जम्वाल के नेतृत्व में NIMAS की बढ़ती क्षमताओं को भी दर्शाती है और भारतीय पर्वतारोहण के क्षेत्र में संस्थान की बढ़ती पहचान को मजबूत करती है।
जम्मू की धरती के इस सपूत ने एक बार फिर दुनिया की ऊंची चोटियों पर तिरंगा और जम्मू-कश्मीर का नाम पहुंचाकर पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है।


