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भविष्य की दुनिया कैसी होगी? एआई के बाद ह्यूमनॉइड रोबोट की दस्तक 2050 तक छा सकती हैं अरबों मशीनें

डेस्क: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (artifical Intelligence)यानी एआई (AI)ने बीते कुछ वर्षों में इंसानों की जिंदगी और काम करने के तरीके को तेजी से बदल दिया है। अब टेक्नोलॉजी (Technology)की अगली बड़ी क्रांति ह्यूमनॉइड रोबोट(Revolutionary Humanoid Robot) के रूप में सामने आती दिखाई दे रही है। ये ऐसे रोबोट हैं जिन्हें इंसानों की तरह चलने फिरने और आसपास के वातावरण को समझकर काम करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुमानों के मुताबिक आने वाले दशकों में इनकी संख्या इतनी तेजी से बढ़ सकती है कि वर्ष 2050 तक दुनिया में करीब एक अरब ह्यूमनॉइड रोबोट मौजूद हो सकते हैं।
ह्यूमनॉइड रोबोट को खास बनाने वाली बात उनका इंसानी शरीर जैसा डिजाइन है। इनमें दो पैर दो हाथ और इंसानों की तरह काम करने की क्षमता विकसित की जा रही है। इसका मकसद केवल रोबोट को देखने में इंसान जैसा बनाना नहीं है बल्कि ऐसी जगहों पर भी उनसे काम लेना है जहां मौजूदा मशीनों के लिए काम करना मुश्किल होता है। एआई की मदद से इन रोबोट को आसपास की चीजों को पहचानने और परिस्थितियों के अनुसार प्रतिक्रिया देने की क्षमता भी दी जा रही है।
फैक्ट्री और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ह्यूमनॉइड रोबोट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ सकता है। भारी सामान उठाने से लेकर लगातार दोहराए जाने वाले काम तक इन मशीनों से कराए जा सकते हैं। ऐसे कामों में इंसानों के लिए थकान और चोट का खतरा रहता है जबकि रोबोट लंबे समय तक लगातार काम कर सकते हैं। इसके अलावा गोदामों अस्पतालों निर्माण स्थलों और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में भी इनका इस्तेमाल बढ़ने की संभावना है।
एआई और रोबोटिक्स का मेल इस बदलाव को और तेज कर सकता है। पहले रोबोट को किसी खास काम के लिए प्रोग्राम किया जाता था। अब एआई की वजह से मशीनों को अधिक जटिल परिस्थितियों को समझने और उनसे सीखने की क्षमता देने पर काम हो रहा है। यही कारण है कि ह्यूमनॉइड रोबोट को भविष्य की ऑटोमेशन तकनीक का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
हालांकि एक अरब रोबोट तक पहुंचने की राह आसान नहीं होगी। सबसे बड़ी चुनौती इनकी लागत है। अत्याधुनिक सेंसर कैमरा बैटरी मोटर और कंप्यूटिंग सिस्टम की वजह से आज ह्यूमनॉइड रोबोट काफी महंगे हैं। बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होने के बाद इनकी कीमत कम हो सकती है लेकिन इसके लिए तकनीक और सप्लाई चेन दोनों को बड़े स्तर पर विकसित करना होगा।
इसके साथ ही सुरक्षा और रोजगार को लेकर भी सवाल उठेंगे। अगर रोबोट बड़ी संख्या में इंसानों के काम करने लगते हैं तो कुछ क्षेत्रों में नौकरियों की प्रकृति बदल सकती है। वहीं खतरनाक और कठिन कामों से इंसानों को दूर रखने में यही तकनीक मददगार भी साबित हो सकती है। इसलिए भविष्य में चुनौती सिर्फ रोबोट बनाने की नहीं बल्कि इंसानों और रोबोट के बीच सही तालमेल विकसित करने की भी होगी।

2050 तक एक अरब ह्यूमनॉइड रोबोट का अनुमान आज भले ही बेहद बड़ा आंकड़ा लगता हो लेकिन एआई और रोबोटिक्स में हो रही तेज प्रगति यह संकेत दे रही है कि आने वाले वर्षों में मशीनें हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का और बड़ा हिस्सा बन सकती हैं। जिस तरह स्मार्टफोन और एआई ने काम करने के तरीके को बदला है उसी तरह ह्यूमनॉइड रोबोट अगली बड़ी तकनीकी क्रांति का आधार बन सकते हैं। आने वाला समय यह तय करेगा कि ये मशीनें केवल कारखानों तक सीमित रहती हैं या इंसानों के साथ घरों दफ्तरों और सार्वजनिक सेवाओं में भी दिखाई देने लगती हैं।

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