डेस्क : आजकल खराब खानपान, कम शारीरिक गतिविधि और बदलती lifestyle के कारण डायबिटीज एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। हाई ब्लड शुगर लंबे समय तक बना रहे तो इसका असर शरीर के कई अंगों पर पड़ सकता है। ऐसे में दवाइयों और डॉक्टर की सलाह के साथ नियमित physical activity भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। योग भी इसी का एक हिस्सा हो सकता है। योग गुरु बाबा रामदेव ने भी ब्लड शुगर को मैनेज करने के लिए कई योग और प्राणायाम बताए हैं। आइए जानते हैं इन 5 अभ्यासों के बारे में और इन्हें करने का सही तरीका।
अनुलोम विलोम (Anulom Vilom)
अनुलोम विलोम एक तरह का breathing exercise है। इसे नियमित रूप से करने से तनाव कम करने और शरीर को रिलैक्स करने में मदद मिल सकती है। तनाव और खराब नींद जैसे lifestyle factors ब्लड ग्लूकोज मैनेजमेंट को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए stress management डायबिटीज मैनेजमेंट का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कैसे करें: आराम से बैठकर रीढ़ की हड्डी सीधी रखें। दाएं हाथ के अंगूठे से दाईं नाक को बंद करें और बाईं नाक से धीरे-धीरे सांस लें। अब बाईं नाक बंद करके दाईं नाक से सांस छोड़ें। इसके बाद दाईं नाक से सांस लें और बाईं नाक से छोड़ें। शुरुआत में इसे धीरे-धीरे और अपनी क्षमता के अनुसार करें।
वज्रासन (Vajrasana)
वज्रासन सरल योगासन में शामिल है और इसे भोजन के बाद कुछ समय के लिए किया जा सकता है। यह शरीर को स्थिर रखने और आराम देने में मदद करता है। हालांकि, घुटनों से जुड़ी समस्या होने पर इसे करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
कैसे करें: घुटनों के बल बैठें और अपने कूल्हों को एड़ियों पर टिकाएं। दोनों हाथों को घुटनों पर रखें और पीठ को सीधा रखें। सामान्य तरीके से सांस लेते हुए कुछ देर इसी मुद्रा में बैठें।
उष्ट्रासन को Camel Pose भी कहा जाता है। इसमें शरीर पीछे की ओर झुकता है, जिससे छाती और पेट के हिस्से में खिंचाव महसूस होता है। योग अभ्यास का नियमित हिस्सा होने पर यह flexibility और posture सुधारने में मदद कर सकता है।
कैसे करें: घुटनों के बल बैठकर शरीर को सीधा रखें। धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकें और हाथों से एड़ियों को पकड़ने की कोशिश करें। गर्दन पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डालें। कुछ सेकंड इसी मुद्रा में रहने के बाद धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौटें।
हलासन (Plough Pose)
हलासन को Plow Pose भी कहा जाता है। यह अपेक्षाकृत कठिन योगासन है, जिसमें पैरों को सिर के पीछे ले जाना होता है। इसे करने के दौरान गर्दन और रीढ़ पर दबाव पड़ सकता है, इसलिए शुरुआती लोगों को इसे योग प्रशिक्षक की देखरेख में करना चाहिए।
कैसे करें: पीठ के बल लेट जाएं और दोनों पैरों को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं। इसके बाद पैरों को सिर के पीछे जमीन की ओर ले जाने की कोशिश करें। शरीर पर ज्यादा दबाव न डालें। कुछ समय रुकने के बाद धीरे-धीरे पैरों को वापस नीचे लाएं।
धनुरासन को Bow Pose कहा जाता है। इस आसन में शरीर धनुष की तरह दिखाई देता है। इससे पेट, पीठ और छाती की मांसपेशियों में खिंचाव आता है और शरीर की flexibility पर काम किया जा सकता है।
कैसे करें: पेट के बल लेट जाएं। दोनों घुटनों को मोड़कर पैरों को ऊपर की ओर लाएं और हाथों से टखनों को पकड़ें। अब धीरे-धीरे छाती और जांघों को ऊपर उठाने की कोशिश करें। अपनी क्षमता के अनुसार कुछ सेकंड रुकें और फिर आराम से सामान्य स्थिति में आ जाएं।
क्या योग से डायबिटीज ठीक हो सकती है?
योग को डायबिटीज की दवा या इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। नियमित शारीरिक गतिविधि और योग कुछ लोगों में blood glucose management, तनाव और overall fitness में मदद कर सकते हैं, लेकिन डायबिटीज वाले व्यक्ति को डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा, खानपान और नियमित रक्त शर्करा की निगरानी जारी रखनी चाहिए। खासकर अगर आप insulin या blood sugar कम करने वाली दवाएं लेते हैं, तो exercise routine में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य योग प्रशिक्षक से सलाह लें।


