दरभंगा : संस्कृत विश्वविद्यालय मुख्यालय के दरबार हॉल में आयोजित हिन्दी दिवस समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो लक्ष्मीनिवास पांडेय ने कहा कि अपनी भाषा की उन्नति के बिना स्वयं की व समाज की उन्नति सम्भव नहीं है। इसलिए भाषा का चतुर्दिक विकास हमारा प्राथमिक दायित्व बनता है। इस ओर युवाओं पर विशेष जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बिना हिन्दी की उन्नति के हिन्दस्तान का इकबाल सम्भव नहीं है। निज भाषा का उत्थान संस्कृति का उत्थान है। इसी क्रम में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश कुमार ने कहा कि भाषा केवल बोली नहीं जाती, भाषा को जिया भी जाता है। आज हम सभी यहाँ एक ऐसी भाषा का उत्सव मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं जो केवल हमारे भावों को व्यक्त करने का माध्यम ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, संवेदना और पहचान की अभिव्यक्ति भी है और वह है हमारी हिन्दी। हिंदी प्राचीनतम भाषा है। आमीर खुसरो के ग्रन्थों में तथा तुगलक काल मे भी हिंदी का बोलबाला था। उन्होंने कहा कि
आज हम केवल हिन्दी दिवस न मनाएँ, बल्कि हिन्दी को अपने दैनिक जीवन में सम्मान देने और अधिकाधिक प्रयोग करने का संकल्प भी लें। उक्त जानकारी देते हुए पीआरओ डॉ निशिकांत ने बताया कि मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती पूजन के बाद शुरू हुए कार्यक्रम में छात्रा काजल, भार्गवी भारती ने कुलगीत गाया। 
विशिष्ट वक्ता डॉ. निहार रंजन सिन्हा ने भी हिंदी की विशेषताओं को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि हिंदी दिलों को जोड़ती है। यही इसकी बड़ी ताकत है। प्रेमचन्द, निराला, दिनकर जैसे सैकड़ों महान लेखकों को हिंदी ने ही प्रसिद्धि दिलायी है। वहीं,
कुलसचिव डॉ. दिनेश झा तथा अध्यक्ष छात्र-कल्याण प्रो. पुरेन्द्र वारिक ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा ही नहीं बल्कि हमारे सम्मान व संस्कार की भाषा है। कहा कि अंग्रेजी ज्ञान की भाषा हो सकती है लेकिन हिंदी भाव की भाषा है। कार्यक्रम में वैदिक मङ्गलाचरण सहायक प्राध्यापक डॉ. छबिलाल न्यौपाने ने प्रस्तुत किया। रमेश्वरलता सं. महा विद्यालय के सहायक प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार ने स्वागत भाषण दिया।स्नातकोत्तर साहित्य विभाग के सहायक प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार कार्यक्रम के संयोजक थे जबकि सह-संयोजिका एवं मञ्च सञ्चालन की जिम्मेदारी स्नातकोत्तर साहित्य विभाग की सहायक प्राचार्या डॉ. निशा के हाथों रही।सहायक प्राचार्य डॉ. कुमार ने ही
धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

