अंतरराष्ट्रीय

भारत की सीमा तक पहुंचेगा चीन का ‘गोल्डन लूप’ ! 25,000 किमी की रिंग रोड से बढ़ी टेंशन

डेस्क: चीन अपनी जमीनी सीमाओं और समुद्र तटों के साथ एक बड़ा रोड लिंक बना रहा है। इस प्रोजेक्ट को इकोनॉमिक डेवलपमेंट, सोशल स्टेबिलिटी और नेशनल यूनिटी को बढ़ावा देने की कोशिश के तौर पर पेश किया गया है।

इसमें 25,000 किमी से ज्यादा का रूट कई ऐसे इलाकों से होकर गुजरेगा, जहां बड़ी एथनिक माइनॉरिटी आबादी है। साथ ही यह भारत की सीमा के पास से भी निकलेगा। यह एक बड़ा प्रोजेक्ट है लेकिन जियोपॉलिटिकल और इकोलॉजिकल रिस्क पैदा करता है। इस प्रोजेक्ट में खासतौर से भारतीय सीमा के आसपास के इलाके मुश्किल का सबब बन सकते हैं।

 

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजिंग को यह सड़क पूरी करने के लिए मुश्किल जियोपॉलिटिकल इलाकों से गुजरना होगा। यह उन इलाकों के पास से गुजरेगा, जहां दशकों पुराने जमीनी झगड़े रहे हैं। साथ ही कमजोर इकोसिस्टम वाले ऊबड़-खाबड़ इलाकों में इकोलॉजिकल खतरों को भी चीनी सरकार को मैनेज करना होगा।

 

भारत सीमा से गुजरेगा

 

चीन की सरकारी मीडिया ने इस रोड प्रोजेक्ट को गोल्डन बॉर्डर-कोस्ट लूप नाम दिया है, जिसे 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य है। जुलाई में चीन की ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री ने इसके लिए पांच साल का ब्लूप्रिंट जारी किया है। इसमें बताया गया है कि इस रिंगरोड के तीन सेक्शन होंगे।

पहला हिस्सा: G219 हाईवे चीन के दक्षिण-पश्चिम से गुआंग्शी झुआंग से युन्नान प्रांत और तिब्बत ऑटोनॉमस रीजन होते हुए शिनजियांग के उत्तरी सिरे तक जाता है। 10,000 किमी का यह रास्ता वियतनाम, लाओस, म्यांमार, भारत, भूटान, नेपाल, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और रूस से लगी चीन की सीमाओं से गुजरेगा।

 

दूसरा हिस्सा: दक्षिणी और उत्तरी शिनजियांग को जोड़ने वाली सड़क का एक हिस्सा तियानशान पहाड़ों के नीचे से गुजरेगा। इसमें 15.7 किमी सुरंग अगले साल चालू होने की संभावना है। दूसरा हाईवे G331 शिनजियांग से चीन के उत्तरी बॉर्डर इलाकों से गुजरता है। 9,200 किमी का रास्ता रूस, मंगोलिया और उत्तर कोरिया के साथ चीनी सीमाओं के पास से गुजरेगा।

 

तीसरा सेक्शन: 7,000 किमी का G228 हाईवे है, जो देश के कोस्टलाइन के साथ बना है। यह ज्यादातर ट्रैफिक के लिए पहले से ही खुला है। यह लियाओनिंग से हेबेई, तियानजिन, शेडोंग, जिआंग्सू, शंघाई, झेजियांग, फ़ुजियान और ग्वांगडोंग होते हुए गुआंग्शी वापस आता है।

भारत का रहा है विरोध

 

चीनी सरकार को कंस्ट्रक्शन को आगे बढ़ाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। चीन और भारत के बीच रिश्तों में बॉर्डर विवाद लगातार बना हुआ है। भारत खासतौर से G219 हाईवे को चिंता की नजर से देखता है। दिल्ली ने 2024 में विवादित बॉर्डर इलाकों में हो रहे रोड अपग्रेड और एक्सटेंशन का विरोध किया था, जो G219 प्रोजेक्ट की तैयारी का हिस्सा था।

 

भारत की एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन पर भी चिंता है। जून में चीन के इकोलॉजी और एनवायरनमेंट मिनिस्ट्री की अगले पांच सालों के प्रोजेक्ट पर रिपोर्ट में कहा गया था कि सड़क के पास के कई इलाकों में मॉनिटरिंग की जरूरत होगी। इसमें तिब्बत के अल्पाइन बॉर्डर वाले इलाके, दक्षिणी शिनजियांग का रेगिस्तान और तियानशान पहाड़ों के ग्लेशियर वाले इलाके शामिल हैं।

 

तिब्बत के पास सड़क

 

बीजिंग ने तिब्बत की राजधानी ल्हासा से शिनजियांग के होतान तक चलने वाली 1,980 किमी लाइन के कंस्ट्रक्शन की देखरेख के लिए शिनजियांग-तिब्बत रेलवे कंपनी बनाई। 2022 में चीन ने तिब्बत में ल्हुंजे और शिनजियांग में माझा के बीच एक नए हाईवे के प्लान के बारे में बताया है। यह बीजिंग और नई दिल्ली के ओवरलैपिंग क्लेम वाले इलाकों के पास से गुजरेगा। यह सड़क G219 को काटेगी, जो अभी बन रही है।

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