हमारे प्रशिक्षित स्वयंसेवक धैर्य पूर्वक आपदा के समय आम लोगों को बचाने का पूर्ण प्रयास करेंगे- प्रो दिलीप चौधरी
बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, पटना के सौजन्य से ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय,
दरभंगा: के राष्ट्रीय सेवा योजना कोषांग द्वारा समस्तीपुर जिला के विभिन्न कॉलेजों के 200 एनएसएस स्वयंसेवकों का सात दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर का जुबिली हॉल में अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया। शिविर का शुभारंभ राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान से हुआ। अतिथियों का स्वागत पाग, चादर, पुष्पगुच्छ एवं मोमेंटो से किया गया। विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो दिलीप कुमार चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में दरभंगा के सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी प्रणव राज, मुख्य वक्ता हवलदार कृष्ण नंदन सिंह, सम्मानित अतिथि के रूप में भूगोल के प्राध्यापक सह आपदा प्रशिक्षक डॉ हरीश सामारिया, विषय प्रवेशक सह शिविर संयोजक डॉ आर एन चौरसिया, स्वागत कर्ता सह कार्यक्रम समन्वयक-02 डॉ शबनम कुमारी आदि ने विचार व्यक्त किया। वहीं उद्घाटन सत्र से पूर्व छात्र-छात्राओं का पंजीयन पाया गया तथा शैक्षणिक सामग्री एवं आपदा प्रबंधन पुस्तक प्रदान किया गया।
डॉ प्रियंका राय के कुशल संचालन में आयोजित समारोह में डॉ सोनू राम शंकर, डॉ अनुपम प्रिया, डॉ प्रेम कुमारी, डॉ सुभाष राय, मनीष राज, मुकेश कुमार झा, मणिकांत ठाकुर, अमित कुमार झा, रवीन्द्र कुमार सिंह आदि ने सक्रिय भूमिका निभाया। वहीं एसडीआरएफ, पटना टीम की ओर से हवलदार कृष्ण नंदन सिंह, रूपेश कुमार पासवान, देव कुमार, खोखो कुमार, मालिक कुमार, राजू कुमार, तनुजा कुमारी, संतोषी कुमारी तथा अयोध्या प्रसाद सिंह आदि ने तकनीकी सत्रों में स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण दिया।
प्रो दिलीप कुमार चौधरी ने 800 स्वयंसेवकों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देने को समाज के लिए काफी लाभदायक बताते हुए कहा कि एनएसएस स्वयंसेवक सेवा की प्रतिमूर्ति होते हैं। ये समाज को अपने से ऊपर रखकर स्वच्छता, स्वास्थ्य, वृक्षारोपण आदि के सामाजिक कार्य करते रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि प्रशिक्षण के बाद हमारे स्वयंसेवक धैर्य पूर्वक आपदा के समय में भी आम लोगों को बचाने का पूर्ण प्रयास करें। उन्होंने आह्वान किया कि प्रशिक्षण के बाद स्वयंसेवक अपने कॉलेज एवं समाज में निरंतर मॉक ड्रिल आदि के माध्यम से लोगों को जागरूक करेंगे।
मुख्य अतिथि प्रणव राज ने कहा कि यद्यपि प्रशासन पूरी तैयारी करता है, पर उनकी अपनी सीमाएं हैं। उनके पहुंचने से पहले प्रशिक्षित स्वयंसेवक आपदा काल में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। कहा कि स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करने की योजना 2024 में शुरू हुई। भारत में 15 से 21 जनवरी के बीच आपदा सप्ताह मनाया जाता है, जिस दौरान लोगों को जागरूक किया जाता है। मुख्य वक्ता हवलदार कृष्ण नंदन सिंह ने कहा कि हमारे ये स्वयंसेवक साधारण नहीं है, बल्कि ऊर्जावान एवं उत्साह युक्त हैं। प्राकृतिक एवं मानव जनित आपदाओं को हम रोक नहीं सकते हैं, पर समाज को जागरुक कर बचाव कार्य जरूर कर सकते हैं। प्रशिक्षण से हमारा राज्य एवं देश सुरक्षित होंगे। कहा कि प्रशिक्षित स्वयंसेवक आपदा के समय भगवान के रूप में पीड़ित मानव के बीच खड़े होंगे। सम्मानित अतिथि डॉ हरीश सामारिया ने कहा कि आपदा से बचने के लिए हमें एक उन्नत मेकैनिज्म तैयार करना होगा। आपदा से धन-जन के साथ ही पर्यावरण को भी काफी नुकसान पहुंचता है। यदि कोई समुदाय दुर्घटनाओं से बचाव में असमर्थ हो जाता है तो वही आपदा का रूप ले लेता है। तकनीकी सत्रों में एसडीआरएफ की टीम ने आपदा के प्रकार, आपदा के कारण, आपदा के पहले, आपदा के दौरान तथा आपदा के बाद किए जाने वाले बचाओ की विस्तार से जानकारी दें।

