
दरभंगा : दुर्लभ पुरावशेषों को यथाशीघ्र संरक्षित करने और संरक्षण कार्य में लापरवाही बरतने की जांच के लिए लिखा गए पत्र के जवाब में महाराधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय की सामग्रियों को संरक्षित करने का निर्देश दिया गया है।
बता दें कि केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा महाराधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय, दरभंगा की सामग्रियों को शीघ्र संरक्षित करने के लिए निर्देशित किया गया है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा नेशनल रिसर्च लेबोरेटरी फॉर कंजरवेशन ऑफ कल्चरल प्रॉपर्टी (एनआरएलसी), लखनऊ के डायरेक्टर जनरल को महाराधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय, दरभंगा के हाथी दांत से निर्मित दुर्लभ पुरावशेषों को यथाशीघ्र संरक्षित करने तथा संरक्षण कार्य में लापरवाही एवं शिथिलता बरतने की जांच के लिए पत्र लिखा गया है।
मंत्रालय के कर्तव्य भवन-2, नयी दिल्ली से दिनांक 6 अगस्त, 2026 को एन आर एल सी, लखनऊ के डायरेक्टर जनरल के नाम भेजे गये पत्र में कहा गया है कि संग्रहालय के पूर्व संग्रहालयाध्यक्ष डॉ. शिव कुमार मिश्र द्वारा प्रधानमंत्री को इस संबंध में पत्र लिखकर शिकायत दर्ज करायी गयी है।
डॉ. मिश्र के अनुसार महाराधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय, दरभंगा एवं एनआरएलसी, लखनऊ के बीच 2019 में एक एग्रीमेंट किया गया था। इस आलोक में संग्रहालय के 155 दुर्लभ पुरावशेषों एवं कलावस्तुओं का संरक्षण किया जाना था। इस कार्य पर 1,65,90,000 (एक करोड़ पैंसठ लाख नब्बे हजार) रुपये खर्च पर सहमति बनी थी। 50% रकम 82,50,000 रुपये एन आर एल सी लखनऊ को अग्रिम भुगतान कर दिया गया था। एक साल के अंदर संरक्षण कार्य पूरा किया जाना तय हुआ था, लेकिन एन आर एल सी, लखनऊ की लापरवाही एवं शिथिलता के कारण अबतक काम पूरा नहीं किया गया, जिसके चलते दुर्लभ पुरावशेषों एवं कलावस्तुओं में और अधिक क्षरण हो गया है।
मंत्रालय द्वारा एनआरएलसी, लखनऊ के डायरेक्टर जनरल को डॉ. शिव कुमार मिश्र की शिकायतों की अभिलेख जांच कराकर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया गया है, साथ ही यह भी निर्देशित किया गया है कि शिकायत के आलोक में दुर्लभ पुरावशेषों एवं कलावस्तुओं के संरक्षण कार्य अगर लम्बित है, तो इसे यथाशीघ्र पूरा करके विभाग को सूचित किया जाये। विभाग द्वारा अनुपालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए भी निर्देशित किया गया है।
पूर्व संग्रहालयाध्यक्ष एवं इंटेक बिहार स्टेट के को-कन्वेनर डॉ. मिश्र ने बताया कि भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा उक्त निर्देश की प्रतिलिपि शिकायतकर्ता को भी भेजा गया है।

