डेस्क: पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति में सांसद पार्थ भौमिक (Partha Bhowmick) को लेकर एक बार फिर सियासी विवाद तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) छोड़कर नई राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ रहे भौमिक के खिलाफ उनके बैरकपुर लोकसभा क्षेत्र (Barrackpore) में पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों में उनकी तस्वीर के साथ उन्हें ‘गद्दार’ बताया गया है और लोगों से उनसे सावधान रहने की अपील की गई है। खास बात यह है कि ये पोस्टर उस समय सामने आए, जब दिल्ली में पार्थ भौमिक की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन के साथ मुलाकात की तस्वीरें चर्चा में थीं। दिल्ली में बैठकों के कुछ ही घंटे बाद बैरकपुर में पोस्टर सामने आने से राज्य की राजनीति में इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पार्थ भौमिक पश्चिम बंगाल की राजनीति में करीब डेढ़ दशक से सक्रिय रहे हैं। उन्होंने 2011 से 2021 के बीच नैहाटी विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के विधायक के रूप में तीन बार चुनाव जीता। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें बैरकपुर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था। भौमिक ने चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया और अपने क्षेत्र में पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे। हालांकि बाद में राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के बीच उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से दूरी बना ली और नई बनी नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI के साथ जुड़ गए।
पार्टी से अलग होने के बाद भौमिक ने विपक्षी गठबंधन से भी दूरी बनाई और बीजेपी के समर्थन की दिशा में कदम बढ़ाया। इसी राजनीतिक बदलाव को लेकर उनके पुराने राजनीतिक क्षेत्र में विरोध के स्वर दिखाई देने लगे हैं। बैरकपुर में लगाए गए पोस्टरों में भौमिक की तस्वीर इस्तेमाल की गई है और उन पर ‘इस गद्दार से सावधान रहें’ जैसे शब्द लिखे गए हैं। पोस्टरों में कथित तौर पर बैरकपुर लोकसभा क्षेत्र के नागरिकों की ओर से संदेश दिया गया है। हालांकि इन पोस्टरों को किसने लगाया, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
भौमिक के खिलाफ सामने आए पोस्टरों ने तृणमूल कांग्रेस छोड़ने के उनके फैसले को लेकर राजनीतिक बहस को और बढ़ा दिया है। तृणमूल कांग्रेस से जुड़े भाटपाड़ा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व उम्मीदवार अमित गुप्ता ने कहा कि भौमिक के पार्टी छोड़ने के फैसले से कई मतदाता नाराज हुए हैं। उनका दावा है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में पांच लाख से अधिक मतदाताओं ने भौमिक को समर्थन दिया था और पार्टी बदलने के फैसले से उनमें से कुछ लोग खुद को आहत महसूस कर सकते हैं।
गुप्ता ने यह भी कहा कि भौमिक के तृणमूल कांग्रेस छोड़ने के कारण उन्हें ‘गद्दार’ कहा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भौमिक ने पार्टी नेतृत्व के साथ-साथ उन मतदाताओं के साथ भी विश्वासघात किया, जिन्होंने उन्हें चुनाव में समर्थन दिया था। हालांकि पोस्टर लगाने वालों की पहचान या उनके पीछे किसी संगठन की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दिल्ली में बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से भौमिक की मुलाकात और इसके तुरंत बाद बैरकपुर में उनके खिलाफ पोस्टर सामने आने से पश्चिम बंगाल में दल-बदल की राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। राज्य में पहले भी कई नेताओं के पार्टी बदलने को लेकर तीखे राजनीतिक आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में पार्थ भौमिक के खिलाफ लगाए गए पोस्टरों को उनके राजनीतिक बदलाव के विरोध के तौर पर देखा जा रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इन पोस्टरों के पीछे कौन लोग हैं, लेकिन इस घटनाक्रम ने बैरकपुर से लेकर पूरे पश्चिम बंगाल की सियासत में नई बहस जरूर छेड़ दी है।

