
महाविद्यालय के सचिव डॉ. शरीक हुसैन ने स्वागत भाषण में शिक्षक शिक्षा में गुणवत्ता, नवाचार एवं मानवीय मूल्यों की आवश्यकता पर दिया बल
21वीं सदी का शिक्षक केवल विषय विशेषज्ञ नहीं बल्कि एक मार्गदर्शक, नवप्रवर्तक एवं प्रेरणादायी नेतृत्वकर्ता होना चाहिए : प्रो. आफाक हाशमी
एक सक्षम, संवेदनशील एवं उत्तरदायी शिक्षक ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है : प्रो. एम हसन
बदलते वैश्विक परिदृश्य, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल तकनीक तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के युग में शिक्षकों को निरंतर स्वयं को अद्यतन करना होगा : डॉ. सैयद अब्दुल मोईन
दरभंगा। डॉ० ज़ाकिर हुसैन टीचर्स’ ट्रेनिंग कॉलेज, लहेरियासराय, दरभंगा के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के तत्वावधान में गुरुवार को “The Future of Teaching : Opportunities and Challenges in the 21st Century” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यार्थी-शिक्षक इमदादुल्लाह द्वारा पवित्र तिलावत-ए-कुरआन से हुआ। इसके उपरांत महाविद्यालय की छात्रा शिक्षिकाओं श्यामा, प्रेरणा, प्रियंका, शिल्पी, शालिनी, सलोनी एवं स्नेहा ने स्वागत गान प्रस्तुत कर कार्यक्रम को गरिमामय वातावरण प्रदान किया।

महाविद्यालय के सचिव डॉ० शरीक हुसैन ने स्वागत भाषण देते हुए अतिथियों का अभिनंदन किया तथा शिक्षक शिक्षा में गुणवत्ता, नवाचार एवं मानवीय मूल्यों की आवश्यकता पर बल दिया। अकादमिक इंचार्ज डॉ० एम० आई० हक़ ने अतिथियों का परिचय कराया तथा कार्यक्रम की विषय-वस्तु की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 21वीं सदी में शिक्षक केवल ज्ञान का संप्रेषक नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का नेतृत्वकर्ता है।

मुख्य वक्ता प्रो० अफा़क हाशमी, प्रोफेसर, डॉ० ज़ाकिर हुसैन टीचर्स’ ट्रेनिंग कॉलेज एवं विभागाध्यक्ष, शिक्षा विभाग, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा ने अपने व्याख्यान में कहा कि 21वीं सदी का शिक्षक केवल विषय विशेषज्ञ नहीं बल्कि एक मार्गदर्शक, नवप्रवर्तक एवं प्रेरणादायी नेतृत्वकर्ता होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल प्रौद्योगिकी तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में शिक्षकों को निरंतर अपने ज्ञान एवं कौशल का विकास करना होगा। उन्होंने विद्यार्थी-शिक्षकों से शोधपरक दृष्टिकोण, नवाचारी शिक्षण विधियों तथा नैतिक मूल्यों को अपनाकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने कहा कि एक समर्पित शिक्षक ही विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत आधारशिला है।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो० एम० हसन ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एक सक्षम, संवेदनशील एवं उत्तरदायी शिक्षक ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
मुख्य अतिथि डॉ० सैयद अब्दुल मोईन, पूर्व संयुक्त निदेशक-सह-निदेशक, दूरस्थ शिक्षा, एससीईआरटी, बिहार ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि 21वीं सदी का शिक्षक केवल ज्ञान का संप्रेषक नहीं बल्कि समाज में परिवर्तनकारी नेतृत्वकर्ता, राष्ट्र निर्माता एवं मानवीय मूल्यों का संवाहक है। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल तकनीक तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के युग में शिक्षकों को निरंतर स्वयं को अद्यतन करना होगा। उन्होंने शिक्षक-प्रशिक्षुओं से तकनीकी दक्षता, नवाचार, शोधपरक दृष्टिकोण, व्यावसायिक नैतिकता एवं आजीवन अधिगम को अपनाते हुए विद्यार्थियों में चरित्र निर्माण, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं राष्ट्रीय चेतना का विकास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक समर्पित शिक्षक ही विकसित भारत के निर्माण की सबसे सशक्त आधारशिला है।
अंत में प्रो० एम० ए० खां ने धन्यवाद ज्ञापित किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी शिक्षक एवं बड़ी संख्या में बी०एड० के विद्यार्थी-शिक्षक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रभावशाली मंच संचालन छात्र अध्यापिका प्रिया चौधरी ने किया।

