डेस्क: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने दावा किया है कि पार्टी छोड़ चुके कई सांसद और विधायक वापस लौटना चाहते हैं तथा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के संपर्क में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित पुलिस दबाव के कारण ये नेता फिलहाल खुलकर वापसी नहीं कर पा रहे हैं।
‘छह सांसद और आधे से ज्यादा विधायक संपर्क में’
कुणाल घोष ने कहा कि 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी छोड़कर दूसरे दलों में गए कई नेता अब टीएमसी में लौटने के इच्छुक हैं। उनके मुताबिक, छह सांसद और 50 प्रतिशत से अधिक बागी विधायक सीधे ममता बनर्जी के संपर्क में हैं। हालांकि, उन्होंने किसी भी नेता का नाम या संख्या का विस्तृत विवरण साझा करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वह राजनीतिक कारणों से इन नेताओं की पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहते।
‘पुलिस का दबाव हटे तो 24 घंटे में वापसी’
घोष ने आरोप लगाया कि जिन नेताओं ने पहले दबाव में पार्टी छोड़ी थी, अब उन्हें वापस आने से भी रोका जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “अगर एक दिन के लिए भी पुलिस का दबाव हट जाए, तो हम 24 घंटे के भीतर 56 से 58 विधायकों की वापसी दिखा सकते हैं।”
चंद्र कुमार बोस के इस्तीफे के बीच आया बयान
कुणाल घोष का यह बयान ऐसे समय आया है, जब टीएमसी को एक और झटका लगा है। पार्टी नेता और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते चंद्र कुमार बोस ने निजी कारणों का हवाला देते हुए टीएमसी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।
चंद्र कुमार बोस ने भाजपा छोड़ने के बाद टीएमसी का दामन थामा था और 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी में शामिल हुए थे।
चुनाव के बाद टीएमसी में हुई थी बड़ी टूट
विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी को बड़े पैमाने पर राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा था। चुनाव परिणाम आने के बाद कई विधायक पार्टी छोड़कर बागी खेमे में शामिल हो गए थे। वहीं लोकसभा स्तर पर भी पार्टी के कई सांसद अलग होकर एनडीए समर्थित दलों में चले गए, जिससे संसद में टीएमसी की संख्या प्रभावित हुई।
भाजपा में भी अनुशासन पर सख्ती
इधर, पश्चिम बंगाल भाजपा में भी संगठनात्मक अनुशासन को लेकर सख्त संदेश दिया गया है। राज्य सरकार में मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कथित फिरौती और जबरन वसूली जैसे मामलों में किसी भी भाजपा कार्यकर्ता के शामिल पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई और पार्टी से निष्कासन की चेतावनी दी है।
उनका बयान भाजपा के प्रदेश नेतृत्व की हालिया चेतावनियों के बाद आया है, जिसे पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखने और विवादित गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

