डेस्क: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। नेताजी सुभाष (Subhas) चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र (Chandra) कुमार बोस ने तृणमूल (Trinamool) कांग्रेस (Congress) से इस्तीफा देकर राज्य की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि अब उनका मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों से भरोसा उठ चुका है और वह भविष्य में नेताजी के सिद्धांतों पर आधारित एक नया राजनीतिक मंच (Platform) तैयार करने की दिशा में काम करेंगे। उनके इस फैसले को राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच अहम माना जा रहा है।
चंद्र कुमार बोस ने अप्रैल 2026 में तृणमूल कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी, लेकिन महज चार महीने के भीतर ही पार्टी छोड़ने का फैसला कर लिया। इस्तीफे के बाद उन्होंने कहा कि लंबे राजनीतिक अनुभव के बाद उन्हें महसूस हुआ कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में वैचारिक राजनीति की जगह सत्ता की प्रतिस्पर्धा अधिक प्रभावी हो गई है। इसी कारण उन्होंने मुख्यधारा की राजनीति से दूरी बनाने का निर्णय लिया।
उन्होंने भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें दोनों दलों की राजनीति में कोई मूलभूत अंतर दिखाई नहीं देता। उनके अनुसार दोनों दल अलग-अलग राजनीतिक पहचान रखते हैं, लेकिन जनता से जुड़े कई मुद्दों पर उनकी कार्यप्रणाली में अपेक्षित बदलाव नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि उन्होंने किसी भी स्थापित राजनीतिक दल के साथ आगे नहीं बढ़ने का निर्णय लिया।
चंद्र कुमार बोस ने बताया कि उनका राजनीतिक सफर विभिन्न दलों के साथ जुड़ा रहा है। उन्होंने फॉरवर्ड ब्लॉक, भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस में काम किया है। इन सभी अनुभवों के आधार पर अब वह इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि देश और समाज के सामने मौजूद चुनौतियों के समाधान के लिए एक नए वैचारिक विकल्प की आवश्यकता है। उनका मानना है कि राजनीति का केंद्र सत्ता नहीं बल्कि जनसेवा और सिद्धांत होने चाहिए।
उन्होंने कहा कि उनकी भावी राजनीतिक पहल नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विचारधारा से प्रेरित होगी। समावेशी राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक न्याय और सभी वर्गों को समान अवसर देने की सोच उनके प्रस्तावित मंच की आधारशिला होगी। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को सकारात्मक राजनीति से जोड़ना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा और इसी उद्देश्य से व्यापक जनसंवाद शुरू किया जाएगा।
चंद्र कुमार बोस का राजनीतिक सफर कई महत्वपूर्ण मोड़ों से गुजरा है। उन्होंने वर्ष 2016 में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी और पश्चिम बंगाल इकाई में प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने चुनावी राजनीति में सक्रिय भागीदारी की, लेकिन वर्ष 2023 में भाजपा से अलग होने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का रुख किया, हालांकि वहां उनका राजनीतिक सफर केवल चार महीने तक ही सीमित रहा।
तृणमूल कांग्रेस की ओर से उनके इस्तीफे पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चंद्र कुमार बोस का यह निर्णय पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए राजनीतिक विकल्पों पर चर्चा को और तेज कर सकता है। आने वाले समय में उनका प्रस्तावित नया मंच किस स्वरूप में सामने आता है और जनता के बीच उसे कितना समर्थन मिलता है, इस पर सभी की नजर बनी रहेगी।

