डेस्क: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री शशि पांजा (Shashi Panja) की लगातार दूसरे दिन एनसीपीआई सांसद काकली घोष (Kakali Ghosh) दस्तीदार के क्लिनिक पहुंचने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर नए कयास लगाए जाने लगे हैं। हालांकि दोनों नेताओं ने इन मुलाकातों को पूरी तरह पेशेवर बताते हुए किसी भी राजनीतिक चर्चा से इनकार किया है।
लगातार दो दिन हुई मुलाकात, उठे सवाल
काकली घोष दस्तीदार के कोलकाता स्थित क्लिनिक से बाहर निकलते समय जब पत्रकारों ने शशि पांजा से पूछा कि क्या वह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी छोड़ने जा रही हैं, तो उन्होंने इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया। मुस्कुराते हुए उन्होंने केवल इतना कहा, “मुझे जाना है,” और वहां से रवाना हो गईं। उनके इस संक्षिप्त जवाब के बाद राजनीतिक अटकलों को और बल मिला।
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काकली घोष ने बताया पुराना पेशेवर संबंध
एनसीपीआई सांसद काकली घोष दस्तीदार ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि उनका और शशि पांजा का रिश्ता दशकों पुराना है तथा इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।
उन्होंने बताया कि ब्रिटेन से प्रशिक्षण लेकर लौटने के बाद शशि पांजा उनकी शुरुआती छात्राओं में शामिल थीं और पिछले 30 से 35 वर्षों से दोनों चिकित्सा क्षेत्र में पेशेवर रूप से जुड़ी हुई हैं। उनके अनुसार, दोनों की मुलाकातें मरीजों के इलाज और अन्य चिकित्सा संबंधी कार्यों के सिलसिले में होती रहती हैं।
राजनीतिक चर्चा से किया इनकार
काकली घोष ने स्पष्ट कहा कि हाल की मुलाकातों के दौरान टीएमसी की आंतरिक स्थिति या शशि पांजा के राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई। उन्होंने अपने बेटे की सोशल मीडिया पोस्ट पर भी टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि वह किसी अन्य व्यक्ति के सोशल मीडिया अकाउंट पर की गई पोस्ट पर प्रतिक्रिया नहीं देंगी।
टीएमसी में पहले से जारी है राजनीतिक उथल-पुथल
शशि पांजा की ये मुलाकातें ऐसे समय सामने आई हैं जब विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी में बड़े पैमाने पर राजनीतिक बदलाव देखने को मिले हैं। पार्टी के कई सांसद और विधायक अलग खेमों में चले गए, जिससे राज्य की राजनीति में नए समीकरण बने हैं। ऐसे माहौल में किसी भी वरिष्ठ नेता की गतिविधि पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।
कम हुई राजनीतिक सक्रियता भी बनी चर्चा
संगठनात्मक बदलावों के बाद से शशि पांजा की सार्वजनिक राजनीतिक सक्रियता पहले की तुलना में कम दिखाई दी है। हाल ही में टीएमसी नेता कुणाल घोष ने भी कहा था कि विधानसभा चुनाव के बाद से शशि पांजा पार्टी की गतिविधियों में पहले जैसी सक्रिय नजर नहीं आ रही हैं।
उन्होंने यह भी कहा था कि काकली घोष और शशि पांजा की मुलाकातें यदि केवल दो डॉक्टरों के बीच पेशेवर संबंधों तक सीमित हैं तो समय के साथ यह स्पष्ट हो जाएगा, लेकिन यदि इसके पीछे कोई राजनीतिक कारण है तो उसका जवाब भी भविष्य में सामने आ जाएगा।

