डेस्क: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में साफ कर दिया है कि सरकार का यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को बदलने या उसकी जगह नई योजना लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है, यानी फिलहाल UPS पहले की तरह ही जारी रहेगी।
वित्त मंत्री ने लिखित जवाब में बताया कि 19 जुलाई 2026 तक 1,18,195 कर्मचारी UPS का विकल्प चुन चुके हैं। इनमें नए भर्ती कर्मचारी, वर्तमान कर्मचारी और पहले से सेवानिवृत्त कर्मचारी भी शामिल हैं। सरकार ने यह योजना 1 अप्रैल 2025 से नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत एक विकल्प के रूप में शुरू की थी। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद निश्चित मासिक पेंशन देना और महंगाई के असर से उनकी आय की सुरक्षा करना है।
सरकार के अनुसार, UPS उन कर्मचारियों के लिए बनाई गई है, जो रिटायरमेंट के बाद निश्चित पेंशन चाहते हैं। साथ ही यह योजना सरकारी वित्तीय व्यवस्था पर अधिक बोझ डाले बिना योगदान आधारित (Contributory) मॉडल पर काम करती है। वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि योजना लागू हुए अभी एक साल से थोड़ा ही अधिक समय हुआ है, इसलिए सरकार ने अभी तक इसके प्रदर्शन की कोई औपचारिक समीक्षा नहीं की है।
UPS का लाभ सिर्फ मौजूदा कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। 31 मार्च 2025 तक NPS के तहत कम से कम 10 साल की नियमित सेवा पूरी करके रिटायर हुए कर्मचारी भी इस योजना का विकल्प चुन सकते हैं। इसके अलावा, ऐसे पात्र कर्मचारियों के निधन की स्थिति में उनके कानूनी जीवनसाथी भी योजना का लाभ लेने के हकदार होंगे।
सरकार ने कर्मचारियों की मांग पर UPS चुनने की अंतिम तारीख भी बढ़ाकर 30 नवंबर 2025 कर दी थी। इसके साथ ही UPS चुनने वाले कर्मचारियों को ग्रेच्युटी, मृत्यु या दिव्यांगता की स्थिति में CCS पेंशन नियमों का लाभ और NPS के समान टैक्स बेनिफिट भी दिए गए हैं। इतना ही नहीं, UPS चुनने वाले कर्मचारियों को एक बार के लिए वापस NPS में लौटने का विकल्प* भी दिया गया है। कुल मिलाकर सरकार ने साफ संकेत दिया है कि फिलहाल UPS को जारी रखा जाएगा और इसमें किसी बदलाव की कोई योजना नहीं है।

