डेस्क: अमेरिका (United States) ने ईरान (Iran) की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से कथित रूप से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए भारत, चीन, रूस और ईरान से संबंधित छह व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध (Sanctions) लगाने की घोषणा की है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि ये व्यक्ति और संस्थाएं ऐसे नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो आईआरजीसी (IRGC) को विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराते रहे हैं। इस कदम को पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव और ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, प्रतिबंध उन व्यक्तियों और संस्थाओं पर लगाए गए हैं जिन पर ईरान से जुड़े संगठनों को वित्तीय, तकनीकी, व्यावसायिक या अन्य प्रकार की सहायता उपलब्ध कराने का आरोप है। अमेरिका का कहना है कि ऐसे नेटवर्क का उपयोग सैन्य गतिविधियों, संसाधनों के प्रबंधन और प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जाता रहा है। इसी आधार पर संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं की संपत्तियों तथा वित्तीय लेनदेन पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।
कार्रवाई के दायरे में ऐसी संस्थाएं भी शामिल हैं जिन पर ईरानी विमानन नेटवर्क और उससे जुड़ी गतिविधियों को सहयोग देने का आरोप लगाया गया है। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि इन माध्यमों का उपयोग हथियारों, सैन्य उपकरणों और अन्य संसाधनों के परिवहन में किया जाता रहा है। इसी कारण इनसे जुड़े कारोबारी और वित्तीय संबंधों पर भी प्रतिबंध लागू किए गए हैं।
अमेरिका ने यह भी कहा कि वह उन सभी व्यक्तियों और संगठनों की पहचान करने की प्रक्रिया जारी रखेगा जो प्रतिबंधित संस्थाओं को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहायता प्रदान करते हैं। प्रशासन का मानना है कि ऐसे नेटवर्क क्षेत्रीय सुरक्षा, अमेरिकी हितों और उसके सहयोगी देशों के लिए संभावित खतरा पैदा कर सकते हैं। इसी वजह से आतंकवाद से जुड़े वित्तीय और लॉजिस्टिक तंत्र को कमजोर करने के लिए लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है।
यह कार्रवाई आतंकवाद से जुड़े संगठनों और उनके समर्थकों के खिलाफ लागू अमेरिकी कानूनी प्रावधानों के तहत की गई है। इन नियमों के अंतर्गत प्रतिबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं की संपत्तियां फ्रीज की जा सकती हैं तथा अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों को उनके साथ किसी भी प्रकार का व्यापार या वित्तीय लेनदेन करने से रोका जाता है। इसके अलावा अन्य देशों की कंपनियों को भी ऐसे संगठनों से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई का प्रभाव केवल संबंधित संस्थाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार, वित्तीय लेनदेन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ सकता है। यदि किसी देश या कंपनी के कारोबारी संबंध प्रतिबंधित संस्थाओं से जुड़े पाए जाते हैं, तो उन्हें भी अतिरिक्त जांच और संभावित प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।
भारत का नाम इस कार्रवाई में आने के बाद भी यह स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंध पूरे देश पर नहीं, बल्कि केवल आरोपित व्यक्तियों और संस्थाओं तक सीमित हैं। इसका भारत और अमेरिका के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर तत्काल कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं माना जा रहा है। फिलहाल इस कार्रवाई पर संबंधित पक्षों की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटनाक्रम पर करीबी नजर रखी जा रही है।

