डेस्क: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हालात एक बार फिर बेहद खराब हो गए हैं। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर आरोप है कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई हैं और इसमें कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई है।
हालात खराब होने की वजह से पीओके के कई इलाकों में इंटरनेट बंद कर दिया गया है, अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।
पाकिस्तान में विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने इस कार्रवाई की आलोचना की है और इसे लोगों के अधिकारों का उल्लंघन बताया है। रावलाकोट से सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस प्रदर्शनकारियों पर गोली चला रही है और आंसू गैस के गोले दाग रही है।
लगातार विरोध प्रदर्शनों से जूझ रहा है पीओके
पीओके पिछले लंबे वक्त से विरोध प्रदर्शनों से जूझ रहा है। इन प्रदर्शनों का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) कर रही है। जेएएसी का गठन 2023 में हुआ था और यह कश्मीर के लोगों को ज्यादा राजनीतिक अधिकार दिए जाने की मांग करती है। जेएएसी की प्रमुख मांग है कि 1947 के बाद पीओके में बाहर से आने वाले लोगों के लिए विधानसभा की जो 12 सीटें आरक्षित की गई हैं, उन्हें खत्म कर दिया जाए।
आंसू गैस के गोले दागे
सोमवार को रावलाकोट के ईदगाह इलाके में हिंसा हुई, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने पीओके में हो रहे विधानसभा चुनाव का बहिष्कार कर दिया। पीओके में इन दिनों विधानसभा के चुनाव चल रहे हैं और यहां 38 लाख मतदाता हैं। लोगों ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना के जवानों, पंजाब रेंजर्स और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई आंसू गैस के गोले दागे।
पुलिस की कार्रवाई में 14 कश्मीरियों की मौत होने के साथ ही सैकड़ों की संख्या में लोगों के घायल होने का भी दावा किया गया है। लोगों ने आरोप लगाया कि सरकार ने मोबाइल सेवाएं बंद कर दी और इंटरनेट कनेक्टिविटी और बिजली को भी ठप कर दिया गया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सेना और पुलिस ने लोगों की आवाज को कुचलने की कोशिश की है। सेना और पुलिस की कार्रवाई के बावजूद जेएएसी का कहना है कि पीओके के लोगों का आंदोलन जारी रहेगा।
जेएएसी के सदस्य इम्तियाज असलम ने कहा, “पाकिस्तान की आतंकवादी ताकतों ने आज हमारे बेगुनाह युवाओं पर गोलीबारी की और इसमें हमारे 14 युवा मारे गए। मैं विदेशों में रहने वाले कश्मीरियों से अपील करता हूं कि आप पाकिस्तानी दूतावासों, दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र के बाहर विरोध प्रदर्शन करें।”
मौलाना फजलुर रहमान ने की निंदा
पीओके में चुनाव के दौरान हुई हिंसा ने पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार के लिए भी बहुत बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी है। विपक्षी दल जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (एफ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने प्रदर्शनकारियों पर हुई गोलीबारी की निंदा की और पाकिस्तान सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस मसले का हल खोजने में फेल रही। उन्होंने कहा कि निहत्थे लोगों पर गोली चलाना खुला आतंकवाद है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पीओके के लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।
पीओके में बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों के बाद पाकिस्तान की सरकार ने जेएएसी पर प्रतिबंध लगा दिया था। भारत ने पीओके में पाकिस्तान की सेना और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की आलोचना की थी।

