अंतरराष्ट्रीय

प्रशांत महासागर में 30 दिन तक मौत से जूझता रहा नाविक, टूटी नाव और खत्म होते राशन के बीच बचाई जान

डेस्क: अमेरिका (America) के कैलिफोर्निया निवासी 39 वर्षीय काई सातो के लिए समुद्री यात्रा (Sea Voyage) उस समय जिंदगी और मौत की लड़ाई में बदल गई, जब प्रशांत महासागर के बीच उनकी सेलबोट क्षतिग्रस्त हो गई। संचार के सभी साधन बंद होने और भोजन-पानी की कमी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। करीब 30 दिन तक समुद्र में बहते रहने के बाद आखिरकार एक मालवाहक जहाज ने उन्हें सुरक्षित बचा लिया।

रिपोर्ट के अनुसार, काई सातो 7 जून को कैलिफोर्निया के कैटालिना आइलैंड से अपनी छोटी सेलबोट लेकर रवाना हुए थे। शुरुआती दिनों में यात्रा सामान्य रही, लेकिन लगभग दो सप्ताह बाद समुद्र में उनकी नाव का मस्तूल (मास्ट) टूट गया। इससे नाव को नियंत्रित करना लगभग असंभव हो गया। कुछ ही समय में ईंधन खत्म हो गया और मोबाइल फोन की बैटरी भी जवाब दे गई, जिससे बाहरी दुनिया से उनका संपर्क पूरी तरह टूट गया।
समुद्र के बीच अकेले पड़ गए
नाव समुद्री धाराओं के साथ बहती हुई मुख्य शिपिंग रूट से दूर निकल गई। चारों ओर सिर्फ समुद्र था और मदद की कोई उम्मीद दिखाई नहीं दे रही थी। काई ने बताया कि शुरुआती दिनों में वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गए थे और उन्हें लगने लगा था कि शायद अब कोई उन्हें खोज नहीं पाएगा।
उन्होंने स्वीकार किया कि एक समय उनके मन में जीवन समाप्त करने जैसे विचार भी आए, लेकिन बाद में उन्होंने खुद को संभाला और हर हाल में जीवित रहने का संकल्प लिया।
सीमित संसाधनों से खुद ठीक की नाव
हालात से हार मानने के बजाय काई ने नाव की मरम्मत करने की कोशिश शुरू की। उन्होंने उपलब्ध पीवीसी पाइप और कयाक के पैडल का इस्तेमाल कर नाव में अस्थायी सुधार किया, जिससे वह उसे धीरे-धीरे आगे बढ़ाने में सफल रहे। उनका उद्देश्य किसी ऐसे समुद्री मार्ग तक पहुंचना था, जहां बड़े जहाजों की आवाजाही होती हो।
भूख और प्यास से भी लड़ी जंग
समुद्र में लंबे समय तक फंसे रहने के कारण उनके पास रखा राशन लगभग खत्म हो गया। उन्होंने बचा हुआ ओटमील (दलिया) बेहद कम मात्रा में खाकर कई दिन बिताए। बाद में छोटी मछलियां और स्क्विड पकड़कर भोजन की जरूरत पूरी की।
सबसे बड़ी चुनौती पीने के पानी की थी। साफ पानी समाप्त होने के बाद उन्होंने नाव पर जमा होने वाली नमी और उपलब्ध सीमित जल स्रोतों से प्यास बुझाने की कोशिश की। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने जीवित रहने का प्रयास जारी रखा।
मालवाहक जहाज ने बचाई जान
करीब एक महीने बाद काई की नाव कैलिफोर्निया और हवाई के बीच एक व्यस्त शिपिंग रूट के पास पहुंच गई। इसी दौरान एक कंटेनर शिप के चालक दल की नजर उनकी क्षतिग्रस्त नाव पर पड़ी। बचाव अभियान चलाया गया और दूसरी कोशिश में रस्सी की सीढ़ी के जरिए उन्हें सुरक्षित जहाज पर चढ़ा लिया गया।
जहाज पर पहुंचने के बाद उन्हें सबसे पहले पानी, साफ कपड़े और ताजा भोजन उपलब्ध कराया गया। काई ने बचाव दल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने मुश्किल समय में परिवार की तरह उनका ख्याल रखा।
फिर भी नहीं टूटा समुद्र से रिश्ता
इस घटना के बाद काई सातो फिलहाल हवाई में अपने रिश्तेदारों के साथ रह रहे हैं। हालांकि इस भयावह अनुभव के बावजूद उन्होंने समुद्री यात्राएं छोड़ने का फैसला नहीं किया है। उनका कहना है कि भविष्य में वह फिर से समुद्र में निकलेंगे, लेकिन इस बार अधिक सुरक्षित और बेहतर तैयारी के साथ।
काई सातो की यह कहानी दिखाती है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, सूझबूझ और लगातार प्रयास इंसान को जीवन की सबसे बड़ी चुनौतियों से उबार सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *