अंतरराष्ट्रीय

ईरान के हिट लिस्ट में 11 बड़े नेता, बेंजामिन और ट्रंप का नाम सबसे पहले!

डेस्क: ईरान में जब हाल ही में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का जनाजा निकला, तो लोगों में दुख के साथ अमेरिका और इजरायल के लिए गुस्सा साफ दिखाई दिया। खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद से ही ईरान में बदले की मांग तेज हो गई है।

इसी बीच ईरान के एक सरकारी अखबार ने एक हिट लिस्ट जारी की है। इसमें दुनियाभर के 11 बड़े नेताओं के नाम है।

 

ईरानी अखबार द्वारा जारी हिट में पहले नंबर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को रखा गया है। नेतन्याहू के अलावा हिट लिस्ट में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी का भी नाम शामिल हैं। सोशल मीडिया पर ईरानी अखबार का हिट लिस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

 

हिट लिस्ट में 11 बड़े नेता का नाम

 

जानकारी के मुताबिक, यह लिस्ट ईरान के सरकारी अखबार हमशहरी ने जारी किया है। अखबार ने अपने पहले पेज पर दुनिया के 11 सबसे बड़े और ताकतवर नेताओं की हिट लिस्ट जारी की है। अखबार ने अपनी हिट लिस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू समेत बड़े नेताओं की तस्वीर छापी है, तस्वीर में सभी नेताओं को कैदियों कपड़ों में दिखाया गया है। इसके साथ ही अखबार ने अपने पेज पर बड़े और साफ शब्दों में एक खुले अल्टीमेटम में बदल तय है लिखा गया है।

 

लिस्ट में शामिल नेताओं के नाम

 

लिस्ट में डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के अलावा ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज का भी नाम शामिल है।

 

ईरान के इस सरकारी अखबार ने इन सभी नेताओं को सीधे तौर पर अपने सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है। अखबार के अनुसार, इजरायल, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली के शीर्ष नेतृत्व ने कथित रूप से ऐसी नीतियां अपनाईं या फैसले लिए, जिनकी वजह से यह स्थिति पैदा हुई।

 

यूरोपीय देशों से नाराज है ईरान

 

ईरान ने यूरोपीय देशों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने संघर्ष के दौरान उसके क्षेत्र पर हुए हमलों की निंदा नहीं की। साथ ही, तेहरान का दावा है कि कुछ देशों ने अमेरिकी सैन्य विमानों को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति देकर हमलों में अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग किया।

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