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सर्राफा बाजार में सुस्त पड़ा सोना, चांदी भी डगमगाया.

डेस्क: सोने की कीमत में इस साल अब तक 33000 रुपये तक गिर चुकी है.चांदी का और बुरा हाल है और वो अपने ऑल टाइम हाई मूल्य से 1.66 लाख रुपये तक गिर चुकी है. कुल मिलाकर साल 2026 सोने के लिए अब तक कुछ खास अच्छा नहीं रहा है

सोने-चांदी की कीमतों में जारी गिरावट के बाद लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि क्या सोना अभी और गिरेगा या कीमतों में वापस से तेजी लौटेगी? सोने-चांदी की कीमतों को लेकर कई भविष्यवाणी की गई है. बड़े निवेशक बैंक से लेकर दिग्गज कमोडिटी एक्सपर्ट सोने की कीमतों का अनुमान लगा रहे हैं.

 

2026 में कितना सस्ता हुआ सोना-चांदी ? 

 

सोना एक साल 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से सस्ता होकर 1.43 लाख रुपये पर पहुंच गया है. 29 जनवरी 2026 को सोने की कीमत उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. 1 किलो चांदी ने भी 29 जनवरी को रिकॉर्ड तेजी हासिल करते हुए 3.86 लाख रुपये के आंकड़े को छू लिया था. आज वो चांदी अब करीब 2.21 लाख रुपये पर पहुंच गई है. सिर्फ घरेलू बाजार में ही नहीं इंटरनेशनल मार्केट में भी सोने-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट देखने को मिली है.ग्लोबल मार्केट में सोना 5,600 डॉलर प्रति औंस के ऑल टाइम हाई पर पहुंच चुका था, जो अब गिरकर 4,100 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच चुका है.

 

क्यों गिरे सोने-चांदी के दाम?

 

सोने-चांदी की कीमत में गिरावट के लिए कई फैक्टर्स जिम्मेदार है. कच्चे तेल से लेकर महंगाई के आंकड़े, डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड जैसे कई कारक सोने के दाम पर असर डालते हैं.

कच्चे तेल की वजह से बढ़ती मंहगाई: कच्चे तेल की कीमतों में लगातार जारी तेजी महंगाई के आंकड़ों तो बढ़ा रही है. बढ़ती महंगाई फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरों को लेकर सख्त रवैया रखने पर मजबूर कर सकती है. ब्याज दर बढ़ा तो सोने की मांग कम हो जाएगी. निवेशक सोने के बजाए बॉन्ड यील्ड में निवेश बढ़ाने लगेंगे. बॉन्ड यील्ड और सोने की कीमतों दोनों का विपरीत संबंध होता है. जब भी ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशक सुरक्षित और ब्याज-मुक्त सोने के बजाय बॉन्ड की ओर आकर्षित होते हैं, जिससे सोने की मांग और कीमत दोनों घट जाती है.

 

मजबूत अमेरिकी डॉलर: फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ी, तो डॉलर और मजबूत होगा. डॉलर के मजबूत होने के मतलब है दूसरी करेंसी में सोना खरीदना और महंगा होता चला जाएगा. डॉलर मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतें और गिरेंगी.

 

सोने में मुनाफावसूली: सोने-चांदी की कीमतों में तेजी के बाद से निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी. जिसकी वजह से कीमतों में अचानक तेज गिरावट आई है.

 

इस साल कैसा रहेगा सोना, और गिरेगा या कीमतों में तेजी लौटेगी?

 

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने अपनी रिपोर्ट में गोल्ड की कीमतों में तेजी की उम्मीद जाहिर कती है. बिगड़ती आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों, ब्याज दरों बदलाव और दीर्घकालिक निवेशकों की बढ़ती भागीदारी के चलते इस साल सोना फिर से वापसी करेगा और सोने के दाम में तेजी लौटेगी. वहीं कमोडिटी एक्सपर्ट्स मानते गैं कि सोना अपना Bottom हासिल कर चुका है और इसमें और बड़ी गिरावट की उम्मीद कम है. एक्सपर्ट के मुताबिक सोने में अगर और गिरावट आती है, तो वो अधिकतम 5 फीसदी तक का फॉल देखने को मिल सकता है. जिस तरह से अमेरिका और ईरान में तनाव बढ़ रहे हैं, सोना थोड़ा और गिर सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म में सोने में रिकवरी देखी जाएगी. JP Morgan ने भी अपनी रिपोर्ट में साल 2030 तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना की कीमत 5,000 प्रति औंस तक जाने की उम्मीद जताई है.

दीवाली 2026 तक कहां जा सकता है सोना?

 

दिवाली-धनतेरस में लोग सोना खरीदते हैं. इस साल दिवाली पर सोने की कीमत को लेकर एक्सपर्ट अनुमान लगा रहे हैं कि अगर अमेरिका-ईरान तनाव कम हुआ तो ये 1.60 लाख रुपये के आसपास रह सकता है, लेकिन अगर युद्ध जारी रहा, तो सोना 1.35 लाख से 1.45 लाख रुपये के बीच रह सकता है.

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