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शिक्षा के क्षेत्र में बदलते समय की मांगों को पूरा करना आवश्यक : डॉ. हसन राष्ट्रीय शिक्षा नीति में व्यावसायिक शिक्षा की वकालत करना है समय की मांग : प्रो. मुश्ताक अहमद

दरभंगा। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय शैक्षणिक परिदृश्य में, विशेषकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव आया है। व्यावसायिक शिक्षा को प्रमुखता दी जा रही है, जो समय की मांग है। इसलिए शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा क्षेत्र में हो रहे बदलावों के साथ साथ अपने शिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रम में भी बदलाव लाना होगा। व्यावसायिक शिक्षा को महत्व देना होगा। ये विचार प्रधानाचार्य सी.एम. कॉलेज, प्रो. मुश्ताक अहमद ने व्यक्त करते हुए कहा जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली के प्रख्यात उर्दू विद्वान और शिक्षक डॉ. जावेद हसन के आगमन पर कॉलेज के उर्दू और फारसी विभाग आयोजित कार्यक्रम मे उन्होंने कहा उर्दू और फारसी विभाग ने राज्य के बाहर से उर्दू विद्वानों और शिक्षकों को आमंत्रित करने और साहित्यिक चर्चाओं का आयोजन करने की यह अच्छी पहल शुरू की है, जिससे छात्रों को लाभ हो रहा है। डॉ. हसन ने कहा बदलते समय के साथ शिक्षा क्षेत्र में बदलावों को स्वीकार करना स्वाभाविक है ताकि हमारे छात्र इस प्रतिस्पर्धी युग में सफल हो सकें। उन्होंने कहा इसमें कोई संदेह नहीं है कि हमारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति में व्यावसायिक शिक्षा के महत्व पर जोर दिया गया है और आज इसे देश के सभी विश्वविद्यालयों में लागू किया जा रहा है। श्री हसन ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा दरभंगा स्थित सी. एम. कॉलेज के उर्दू और फारसी विभाग में अकादमिक और साहित्यिक चर्चाओं के साथ-साथ नए विषयों पर भी काफी विचार-विमर्श होता है। जिससे छात्रों और शिक्षकों दोनों को नई जानकारियों का ज्ञान प्राप्त होता है। इस अवसर पर उर्दू विभाग के अध्यक्ष, डॉ. खालिद अंजुम उस्मानी, डॉ. फैजान हैदर, डॉ. मुजाहिद इस्लाम और डॉ. हादी सरमदी ने भी अपने अपने विचार व्यक्त किया।मिथलांचल की सांस्कृतिक और सभ्य परंपरा के अनुसार, डॉ. जावेद हसन का पाग और चादर और फूलों के गुलदस्ते से स्वागत किया गया। अंत में, उर्दू और फारसी विभाग के प्रमुख डॉ. खालिद अंजुम उस्मानी ने अतिथि के प्रति आभार व्यक्त किया।

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