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ओहदियां खेदां’ से 12 साल बाद संगीत की दुनिया में लौटे हंस राज हंस, कमबैक का अनुभव किया शेयर

डेस्क:गायक से राजनेता बने हंस राज हंस ने एक दशक से अधिक समय बाद संगीत की दुनिया में अपनी वापसी को लेकर अपनी खुशी जाहिर की। अपने सफर को याद करते हुए हंस राज हंस ने बताया कि दोस्तों के प्यार और हौसले ने उन्हें अपने नए गाने ‘ओहदियां खेदां’ के साथ फिर से संगीत की दुनिया में लौटने के लिए प्रेरित किया। संगीत में वापसी को लेकर उन्होंने आईएएनएस से कहा, “मेरा ध्यान संगीत से हट गया था। मैंने शोबिज छोड़कर राजनीति का रास्ता चुना, जिसे मैं समाज और देश की सेवा मानता हूं। इसी वजह से मेरे गायन में 12-13 साल का लंबा अंतर आ गया।” उन्होंने आगे कहा, “फिर मैंने सोचा कि अब मुझे अपने सभी कामों से रिटायर हो जाना चाहिए, लेकिन मेरे दोस्त संजीव आनंद ने कहा कि लोग आज भी मेरे गाने सुनना चाहते हैं। मैंने उनसे कहा कि मैं तो रोज गाता हूं। तब उन्होंने कहा कि मुझे फिर से लोगों के बीच आना चाहिए। उनकी बात मानकर मैंने अपना नया गाना ‘ओहदियां खेदां’ रिलीज किया।”
उनके नए गाने के बोल संजीव आनंद ने लिखे हैं, जबकि इसका संगीत अमदाद अली ने तैयार किया है। यह गाना ‘आनंद रिकॉर्ड्स’ के बैनर तले रिलीज किया गया है।
अपने नए गाने के बारे में हंस राज हंस ने कहा कि यह उनके लिए अपनी भावनाओं और विचारों को लोगों तक पहुंचाने का एक खास माध्यम है। उन्होंने कहा कि यह गाना सीधे तौर पर आध्यात्मिक नहीं है, लेकिन इसके बोल जीवन की गहरी सोच और अनुभवों को बयां करते हैं। इसे सुनते समय एक अलग तरह का आध्यात्मिक एहसास भी होता है।
हंस राज हंस ‘दिल तोते-तोते हो गया’, ‘दिल चोरी साडा हो गया’, ‘नित खैर मंगा’ और ‘सिली-सिली हवा’ जैसे लोकप्रिय गानों के लिए जाने जाते हैं। बाद में उन्होंने राजनीति में कदम रखा। अपने राजनीतिक सफर के दौरान वे शिरोमणि अकाली दल, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे। वह सांसद के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।
साल 2009 के लोकसभा चुनाव में हंस राज हंस ने शिरोमणि अकाली दल में शामिल होकर पंजाब की जालंधर लोकसभा सीट से चुनाव लड़कर राजनीति में कदम रखा। हालांकि, इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

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