खेल हमें कठोर अनुशासन, बेहतर तालमेल बिठाना, समय पर सही निर्णय लेना तथा निरंतर अभ्यास करना सीखना है- प्रो अमृत कुमार झा
दरभंगा:ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के एनएसएस कोषांग द्वारा बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, पटना के सौजन्य से ‘युवा आपदा मित्र आवासीय प्रशिक्षण’ के चौथे दिन एसडीआरएफ टीम ने भूकंप संबंधी मॉकड्रिल एवं सड़क सुरक्षा संबंधी जानकारी दी। आज के प्रशिक्षण का प्रारंभ राष्ट्रगीत एवं एनएसएस लक्ष्य-गीत से हुआ। भूकंप से बचने हेतु मॉक ड्रील का प्रशिक्षण देते हुए खोखो कुमार ने बचने के तरीके बताएं, जिसमें अलार्म, रिस्पांस, निकासी, इकट्ठा होना, हेड काउंट और मूल्यांकन के कुल छह चरण बताया। कहा कि स्वयंसेवकों को फर्स्ट रिस्पांडर बनाने के लिए सर्वप्रथम अलार्म के द्वारा प्रभावित क्षेत्र के लोगों को सतर्क किया जाता है। रिस्पांस में ‘झुको-ढको-पकड़ो’ की विधि बताई गई। उसके बाद निकासी टीम के द्वारा सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। आगे की प्रक्रिया में निकलकर खुले आसमान के नीचे असेंबल होना, उसके बाद हेड काउंट के जरिए गणना करना आदि। तदनुसार प्रभावित क्षेत्र में फंसे व्यक्ति के लिए सर्च एंड रेस्क्यू टीम के द्वारा बचाव कार्य एवं प्राथमिक उपचार कर कैसे बेहतर इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल भेजने की जानकारी दी गई। एसडीआरएफ प्रशिक्षक देव कुमार ने सड़क दुर्घटना के कारण और उससे बचने के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि हर साल लगभग 1,50,000 लोगों की मृत्यु सड़क दुर्घटना से होती है, जिनमें अधिकांश दो पहिया वाहन चालक होते हैं। मरने वालों में ज्यादातर युवा वर्ग के लोग शामिल होते हैं। उन्होंने सड़क सुरक्षा नियमों की विस्तृत जानकारी एवं सड़क दुर्घटना में घायलों को बचाने के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों के लिए ‘गुड समारिटन गाइडलाइन’ के बारे में बताया, जिसमें अच्छे कार्य करने वाले को ‘राहवीर योजना’ के तहत ₹25,000 की पुरस्कार राशि सरकार द्वारा दी जाती है। प्रशिक्षण के दौरान उनके द्वारा जागरूकता के लिए वीडियो फिल्म भी दिखाया गया।
इस अवसर डॉ आर एन चौरसिया, डॉ शबनम कुमारी, डॉ सोनू राम शंकर, डॉ उदय कुमार, मुकेश कुमार झा, अक्षय कुमार झा, मणिकांत ठाकुर, अमित कुमार झा, रवीन्द्र कुमार सिंह, विकास कुमार, सुमित कुमार, सूरज कुमार आदि सक्रिय रहे।
भोजनोपरांत एसडीआरएफ टीम के सदस्य हवलदार कृष्णनंदन सिंह, रूपेश कुमार पासवान, खोखो कुमार, देव कुमार, मालिक कुमार, राजू कुमार, तनुजा कुमारी, संतोषी कुमारी तथा अयोध्या प्रसाद सिंह आदि ने प्रशिक्षुओं को अलग-अलग चार टीमों में बांटकर मॉक ड्रिल का अभ्यास कराया, ताकि छात्र-छात्राएं व्यावहारिक रूप से भी आपदा प्रबंधन की जानकारी प्राप्त कर सकें।
बौद्धिक सत्र में विश्वविद्यालय के खेल पदाधिकारी प्रो अमृत कुमार झा ने “युवावस्था एवं खेल-कूद” पर विशेष व्याख्यान देते हुए बताया कि आज खेल के क्षेत्र में भी रोजी-रोजगार की अत्यधिक संभावना बन गई है। खेल-कूद हमारे जीवन का अभिन्न अंग होना चाहिए। आज खेल मैदान की कमी, मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग एवं आरामदायक जीवनशैली के कारण युवा खेल से दूरी बनाते जा रहे हैं जो काफी चिंताजनक स्थिति है। आज किताबी ज्ञान के साथ ही कौशल के आधार पर ही नौकरी या रोजगार मिल सकता है। सफलता एक दिन में नहीं मिल सकती है। इसके लिए निरंतर प्रयास एवं धैर्य जरूरी है। विकसित भारत के निर्माण हेतु युवा अपने में परिवर्तन लाएं। कहा कि हम जो सोचते हैं और जैसा करते हैं, वैसा ही बन जाते हैं। खेल हमें कठोर अनुशासन, बेहतर तालमेल बिठाना, समय पर सही निर्णय लेना तथा निरंतर अभ्यास करना सीखना है। लाख चुनौतियां आएंगी, पर भविष्य परिश्रमी, अनुशासित एवं कुशल युवाओं का होगा। प्रशिक्षकों, प्रशिक्षुओं एवं समिति के सदस्यों का स्वागत प्रशिक्षण के संयोजक डॉ आर एन चौरसिया ने, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ शबनम कुमारी ने किया।

