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फिल्म ‘द इंडिया स्टोरी’ के निर्देशक चेतन डीके से खास खबर की खास बातचीत

डेस:फिल्म ‘द इंडिया स्टोरी’ के निर्देशक चेतन डीके से खास खबर की खास बातचीत
-रजवल गुप्ता फिल्मों के माध्यम से सामाजिक मुद्दों को सामने लाना हमेशा चुनौतीपूर्ण माना जाता है, क्योंकि ऐसे विषयों में संवेदनशीलता, शोध और जिम्मेदारी तीनों का संतुलन बनाए रखना पड़ता है। आगामी 24 जुलाई को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली पैनइंडिया फिल्म ‘द इंडिया स्टोरी’ भी एक ऐसे ही गंभीर विषय को केंद्र में रखती है, जिसमें कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग और उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को प्रमुखता से उठाया गया है। फिल्म के निर्देशक चेतन डीके की यह पहली पैनइंडिया फिल्म होने के साथ-साथ पहली हिन्दी निर्देशित फिल्म है। इससे पूर्व चेतन डीके ने मराठी फिल्मों में बतौर अभिनेता और निर्माता अपनी एक अलग पहचान बनाई है। चेतनडीके ने इस विषय को केवल एक कहानी के रूप में नहीं, बल्कि समाज के सामने मौजूद एक महत्वपूर्ण सवाल के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। फिल्म के टीज़र ने दर्शकों के बीच चर्चा पैदा की है और यह जानने की उत्सुकता बढ़ाई है कि निर्देशक ने इस विषय को किस दृष्टिकोण से पर्दे पर उतारा है। उनके फिल्मी सफर, निर्देशन में आने की प्रेरणा, इस विषय पर काम करने के अनुभव और ‘द इंडिया स्टोरी’ को लेकर उनके विचारों पर खास खबर डॉट कॉम के संवाददाता रजवल गुप्ता को उनसे बातचीत करने का मौका मिला। प्रस्तुत है उस बातचीत के प्रमुख अंश—
प्रश्न: सबसे पहले आपका बहुत-बहुत स्वागत है। सबसे पहले हमारे दर्शकों को अपने बारे में बताइए। आपका शुरुआती सफर कैसा रहा और फिल्म निर्देशन की दुनिया में आपका आगमन कैसे हुआ?

चेतन डीके: सबसे पहले आपका भी धन्यवाद। मेरा सफर बिल्कुल आसान नहीं रहा। मैं वर्ष 2006 से मुंबई में संघर्ष कर रहा हूं। जैसा कि कहा जाता है कि मुंबई सपनों का शहर है, लेकिन यहां हर सपने को पूरा करने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ता है। मेरा भी सफर कुछ ऐसा ही रहा। मैं पुणे के एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से हूं और मेरा फिल्म इंडस्ट्री से कोई पारिवारिक संबंध नहीं रहा। बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के मैंने अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत की और आज उसी संघर्ष का परिणाम ‘The India Story’ के रूप में दर्शकों के सामने है।
प्रश्न: ‘The India Story’ जैसी सामाजिक विषय पर आधारित फिल्म बनाने का विचार आपको कैसे आया? क्या यह फिल्म किसी वास्तविक घटना, शोध या अनुभव से प्रेरित है?

चेतन डीके: मेरी हमेशा कोशिश रही कि मैं ऐसी फिल्म बनाऊं जो सिर्फ मनोरंजन न करे, बल्कि समाज और देश के लिए भी उपयोगी साबित हो। इसी दौरान मेरे एक करीबी मित्र की मात्र सात वर्ष की बेटी का कैंसर से निधन हो गया। यह घटना मेरे लिए बेहद झकझोर देने वाली थी।
मेरे मन में सवाल उठा कि इतनी छोटी बच्ची को कैंसर कैसे हो सकता है? बचपन से हम यही सुनते आए थे कि कैंसर तंबाकू, बीड़ी या सिगरेट जैसी चीजों से होता है। फिर मैंने और मेरी टीम ने इस विषय पर गंभीरता से रिसर्च शुरू की।
हमने कई डॉक्टरों, ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञों) और मेडिकल रिसर्चर्स से बातचीत की। रिसर्च के दौरान कई ऐसी रिपोर्ट हमारे सामने आईं, जिन्होंने हमें अंदर तक हिला दिया। कुछ रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि मां के दूध में भी कीटनाशकों (Pesticides) के अंश पाए गए। यह हमारे लिए बेहद चिंताजनक था।
इसके बाद हमने और गहराई से अध्ययन किया। हमें पंजाब के बठिंडा के बारे में जानकारी मिली, जहां रात करीब 9:30 बजे चलने वाली एक ट्रेन को लोग ‘कैंसर ट्रेन’ के नाम से जानते हैं। बताया जाता है कि इस ट्रेन से बड़ी संख्या में कैंसर मरीज इलाज के लिए बीकानेर जाते हैं।
इसी दौरान हमने केरल के कासरगोड जिले के एंडोसल्फान मामले पर भी अध्ययन किया। वहां वर्षों तक काजू के बागानों में एंडोसल्फान का हवाई छिड़काव किया गया, जिसके कारण कई बच्चों में जन्मजात विकलांगता, सेरेब्रल पाल्सी और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं सामने आईं। आज भी वहां कई परिवार न्याय और उचित चिकित्सा सहायता की मांग कर रहे हैं।
इन सभी तथ्यों और शोध के बाद हमें महसूस हुआ कि यह सिर्फ एक फिल्म का विषय नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। तभी हमने तय किया कि इस मुद्दे को बड़े पर्दे पर लाना चाहिए ताकि लोगों में जागरूकता बढ़े।
प्रश्न: फिल्म का नाम ‘The India Story’ रखने के पीछे क्या सोच रही?

चेतन डीके: देखिए, यह किसी एक व्यक्ति, शहर या राज्य की कहानी नहीं है। यह पूरे भारत की कहानी है। देश का लगभग हर परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस समस्या से प्रभावित है।
हमारी मूलभूत आवश्यकताओं में सबसे पहले भोजन आता है। यदि हमारा भोजन ही सुरक्षित नहीं होगा, तो स्वस्थ जीवन की कल्पना कैसे की जा सकती है? यही सोच इस फिल्म के शीर्षक की प्रेरणा बनी। इसलिए हमने इसका नाम ‘The India Story’ रखा, क्योंकि यह वास्तव में हर भारतीय की कहानी है।

प्रश्न: फिल्म में काजल अग्रवाल और श्रेयस तलपड़े जैसे कलाकारों के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?

चेतन डीके: बहुत शानदार रहा। जब मैं काजल अग्रवाल और श्रेयस तलपड़े के पास इस फिल्म की कहानी और रिसर्च लेकर गया, तो वे भी काफी भावुक और हैरान हो गए।
उन्होंने तुरंत कहा कि अगर यह फिल्म समाज में जागरूकता ला सकती है, तो वे इसका हिस्सा जरूर बनना चाहेंगे। शूटिंग के दौरान भी दोनों कलाकारों ने पूरे समर्पण के साथ काम किया। ऐसा कभी महसूस नहीं हुआ कि वे सिर्फ अभिनय कर रहे हैं, बल्कि ऐसा लगा जैसे यह उनकी अपनी फिल्म हो। पूरी टीम ने इस प्रोजेक्ट को अपना समझकर पूरा सहयोग दिया।
प्रश्न: भविष्य में भी क्या आप ऐसे ही सामाजिक विषयों पर फिल्में बनाना चाहेंगे?

चेतन डीके: बिल्कुल। मेरा मानना है कि मनोरंजन के साथ-साथ सिनेमा की सामाजिक जिम्मेदारी भी होती है। यदि मुझे भविष्य में ऐसे विषय मिलते हैं, जो समाज के लिए उपयोगी हों और लोगों में जागरूकता पैदा कर सकें, तो मैं निश्चित रूप से उन पर काम करना चाहूंगा।

प्रश्न: अंत में हमारे दर्शकों के लिए आपका क्या संदेश है?

चेतन डीके: मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि ‘The India Story’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि हर भारतीय परिवार की कहानी है। यह माता-पिता, बच्चों और पूरे समाज से जुड़ा विषय है।
मैं सभी दर्शकों से अनुरोध करूंगा कि वे 24 जुलाई को अपने पूरे परिवार के साथ सिनेमाघरों में जाकर यह फिल्म जरूर देखें।
मुझे पूरा विश्वास है कि फिल्म देखने के बाद हर दर्शक एक बार जरूर सोचेगा कि वह अपने परिवार और बच्चों को कितना सुरक्षित और शुद्ध भोजन दे पा रहा है। यदि यह फिल्म लोगों को सोचने पर मजबूर कर देती है, तो हमारा उद्देश्य सफल हो जाएगा।
खास खबर की ओर से निर्देशक चेतन डीके, निर्माता सागर बी. शिंदे और पूरी टीम को ‘The India Story’ के लिए ढेरों शुभकामनाएं। हमें उम्मीद है कि यह फिल्म मनोरंजन के साथ-साथ समाज में जागरूकता का भी मजबूत संदेश देगी।
डायरेक्टर का नोट
“‘द इंडिया स्टोरी’ सिर्फ़ एक फ़िल्म नहीं है, यह एक सवाल, एक आईना और एक आंदोलन है। मैं एक ऐसी कहानी कहना चाहता था जो ज़रूरी और ज़मीन से जुड़ी लगे, और साथ ही ज़िंदगी से भी बड़ी हो। हर फ़्रेम, हर खामोशी और हर धड़कन को इस तरह से तैयार किया गया है कि भारत खुद को बिना किसी फ़िल्टर के देख सके। एक डायरेक्टर के तौर पर, मेरी ज़िम्मेदारी कहानी के बड़े पैमाने और उसकी भावनाओं की गहराई, दोनों को एक साथ बनाए रखने की थी। यह वह फ़िल्म है जिसे बनाने का इंतज़ार मैं अपने पूरे करियर में कर रहा था।

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