अंतरराष्ट्रीय

यूरोप में गर्मी का कहर: सड़कें पिघलीं, रेल पटरियां मुड़ीं, अस्पतालों और बिजली व्यवस्था पर बढ़ा दबाव

डेस्क: यूरोप इस समय रिकॉर्डतोड़ गर्मी की मार (Heatwave wreaks havoc in Europe) झेल रहा है। फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, इटली (Heatwave wreaks havoc in Europe) और अन्य देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे ऊपर पहुंचने से जनजीवन के साथ-साथ बुनियादी ढांचे पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। कई जगह सड़कें पिघल गई हैं, रेल पटरियां गर्मी से टेढ़ी हो गई हैं और परिवहन सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, सप्ताह की शुरुआत में पश्चिमी यूरोप से शुरू हुई हीटवेव अब मध्य और पूर्वी यूरोप तक फैल चुकी है। कई देशों में दशकों पुराने तापमान के रिकॉर्ड टूट गए हैं। डेनमार्क में 1874 के बाद का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया, जहां आरहूस के उत्तर में स्थित ओडुम में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। स्विट्जरलैंड के बासेल में 38.8 डिग्री सेल्सियस और चेक गणराज्य के डोक्सानी में 40.8 डिग्री सेल्सियस का नया रिकॉर्ड दर्ज किया गया। वहीं, ब्रिटेन में जून महीने का अब तक का सबसे गर्म दिन रहा, जहां पारा 37.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया और 1976 का रिकॉर्ड टूट गया।

जर्मनी में हाईवे क्षतिग्रस्त, रेल यात्रियों को चेतावनी
जर्मनी में भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर परिवहन व्यवस्था पर देखा गया। बर्लिन के बाहर ए-2 मोटरवे पर अत्यधिक गर्मी के कारण कंक्रीट की सड़कें फट गईं, जिससे हाईवे के कई हिस्से बंद करने पड़े। अन्य प्रमुख सड़कों पर भी गर्मी से नुकसान की खबरें सामने आई हैं। रेल ऑपरेटर ‘डॉयचे बान’ ने लोगों से गैर-जरूरी रेल यात्रा टालने की अपील की है। कंपनी का कहना है कि रिकॉर्ड तापमान के कारण रेलवे नेटवर्क पर लगातार दबाव बना हुआ है।
फ्रांस में बिजली उत्पादन घटा, ट्रेनों में देरी
फ्रांस में भी हीटवेव ने सड़क, बिजली और रेल सेवाओं को प्रभावित किया है। ‘फ्रांस 24’ की रिपोर्ट के अनुसार, कई इलाकों में सड़कें पिघलने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और ट्रेनों के देर से चलने की घटनाएं सामने आई हैं। सरकारी बिजली कंपनी ईडीएफ ने बताया कि अत्यधिक गर्मी के कारण कूलिंग सिस्टम प्रभावित होने से कुछ परमाणु बिजली संयंत्रों में उत्पादन अस्थायी रूप से कम किया गया है। हालांकि कंपनी ने भरोसा दिलाया कि बिजली की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त क्षमता उपलब्ध है।
अस्पतालों में बढ़े मरीज, नर्सिंग होम खाली कराए गए
गर्मी का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी साफ दिखाई दे रहा है। जर्मनी के डॉरमाजेन स्थित एक नर्सिंग होम में अंदर का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस पहुंचने पर वहां रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा। इस दौरान एक बुजुर्ग की मौत भी हुई, हालांकि अधिकारियों ने कहा कि मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं है।
फ्रांस में भी गर्मी से जुड़ी आपात स्थितियों के कारण अस्पतालों पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है। पेरिस और 36 अन्य क्षेत्रों में उच्चतम स्तर का हीट अलर्ट जारी है। लगातार दूसरे दिन सरकारी अस्पतालों के इमरजेंसी विभागों में करीब 3,000 मरीज पहुंचे, जो सामान्य दिनों की तुलना में लगभग एक-तिहाई अधिक हैं। पेरिस के सभी 38 सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी प्लान लागू कर दिया गया है। मेडिकल हेल्पलाइन पर कॉल में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 80 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। बढ़ते दबाव को देखते हुए पेरिस प्राइड मार्च स्थगित कर दिया गया, जबकि तीन दिवसीय संगीत महोत्सव भी रद्द कर दिया गया।
इटली और ब्रिटेन में भी हाई अलर्ट
इटली ने रोम, मिलान, वेनिस, फ्लोरेंस और बोलोग्ना सहित 18 शहरों में रेड हीट अलर्ट जारी रखा है। तेज धूप से बचने के लिए लोग फव्वारों और छायादार स्थानों का सहारा लेते नजर आए। वहीं, ब्रिटेन में तापमान में थोड़ी गिरावट की संभावना के बावजूद एम्बर हीट वॉर्निंग प्रभावी बनी हुई है।
समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, ब्रिटेन में शनिवार को एक नदी और एक झील से 22 वर्षीय युवक और 15 वर्षीय किशोर के शव बरामद किए गए। इसके बाद देश में गर्मी से जुड़ी मौतों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। प्रशासन ने लोगों से बिना निगरानी वाले जलाशयों में तैराकी से बचने की अपील की है।

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