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बिहार के किसान के बेटे ने रचा इतिहास, 12 साल की उम्र में IIT-JEE पास, 24 की उम्र में PhD, अब अमेरिका में AI वैज्ञानिक

पटना: बिहार के एक किसान परिवार से निकलकर सत्यम कुमार ने वह मुकाम हासिल किया है, जो आज लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा बन चुका है। महज 12 साल की उम्र में IIT-JEE जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षा पास कर उन्होंने इतिहास रच दिया था। आज वह अमेरिका की अग्रणी टेक कंपनी Texas Instruments में Machine Learning Systems Research Engineer के तौर पर कार्यरत हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) व मशीन लर्निंग के क्षेत्र में शोध कर रहे हैं।

12 साल की उम्र में रचा था इतिहास-

20 जुलाई 1999 को बिहार में जन्मे सत्यम कुमार बचपन से ही पढ़ाई में असाधारण प्रतिभाशाली थे। परिवार की आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्हें राजस्थान के कोटा भेजा गया, जहां उन्होंने IIT-JEE की तैयारी की। सिर्फ 12 वर्ष की उम्र में परीक्षा पास कर उन्होंने देश के सबसे कम उम्र के सफल अभ्यर्थियों में जगह बनाई। अगले ही साल दोबारा परीक्षा देकर उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 670 हासिल की।

IIT कानपुर से अमेरिका तक का सफर-

सत्यम ने IIT कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डुअल डिग्री (BTech-MTech) पूरी। पढ़ाई के दौरान उनकी रुचि AI, मशीन लर्निंग और एडवांस कंप्यूटिंग में बढ़ी। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका का रुख किया और कम उम्र में ही शोध के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना ली।

24 साल में पूरी की PhD, अब AI पर कर रहे रिसर्च-

सत्यम कुमार ने महज 24 वर्ष की उम्र में पीएचडी पूरी की। इस दौरान उन्हें Apple में Machine Learning Intern के रूप में काम करने का अवसर भी मिला। फिलहाल वह Texas Instruments में AI और मशीन लर्निंग सिस्टम से जुड़े अत्याधुनिक रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर हो रही जमकर तारीफ-

सत्यम कुमार की उपलब्धि सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग उन्हें बिहार का गौरव और देश के युवाओं के लिए प्रेरणा बता रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने यह साबित कर दिया कि मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन के दम पर कोई भी वैश्विक स्तर पर सफलता हासिल कर सकता है।

युवाओं के लिए बने प्रेरणा –

सत्यम कुमार की कहानी इस बात का प्रमाण है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो गांव के किसान का बेटा भी दुनिया की सबसे बड़ी तकनीकी कंपनियों में अपनी पहचान बना सकता है। उनकी सफलता आज देशभर के लाखों विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा दे रही है।

आशुतोष झा

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