दरभंगा:समग्र संस्कृत विकास समिति, पटना द्वारा आयोजित वार्षिक सम्मान समारोह एवं विचार गोष्ठी का आयोजन गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय ने की, जबकि विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. दिनेश झा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का मुख्य विषय “भारतीय राष्ट्रीयता एवं अस्मिता के अग्रदूत महान नीतिज्ञ चाणक्य के विचारों का दार्शनिक अध्ययन” रहा। इस अवसर पर वक्ताओं ने आचार्य चाणक्य के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उनके राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा दार्शनिक चिंतन की समकालीन प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त किए।
अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय ने कहा कि आचार्य चाणक्य केवल एक महान राजनेता या कूटनीतिज्ञ ही नहीं थे, बल्कि वे भारतीय राष्ट्रचेतना, सांस्कृतिक अस्मिता और सुशासन के सशक्त प्रवक्ता थे। उन्होंने कहा कि चाणक्य के विचार आज भी राष्ट्र निर्माण, नैतिक नेतृत्व, शिक्षा, प्रशासन और सामाजिक समरसता के लिए समान रूप से प्रेरणादायी हैं। नई पीढ़ी को उनके जीवन-दर्शन और नीतियों का अध्ययन कर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा लेनी चाहिए।
विशिष्ट अतिथि कुलसचिव डॉ. दिनेश झा ने कहा कि संस्कृत साहित्य में निहित ज्ञान परम्परा भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। आचार्य चाणक्य का चिंतन केवल इतिहास का विषय नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम भारतीय ज्ञान परम्परा के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ-साथ युवाओं में राष्ट्रीय चेतना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विद्वानों, शिक्षकों एवं संस्कृतसेवियों को वार्षिक सम्मान से सम्मानित किया गया। उपस्थित विद्वानों ने भारतीय ज्ञान परम्परा के संरक्षण, संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार तथा चाणक्य के आदर्शों को समाज में व्यापक रूप से प्रसारित करने का संकल्प व्यक्त किया।

