दरभंगा:योग मानव जीवन को शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्तर पर संतुलित एवं निरोग बनाने का सर्वोत्तम साधन- इन्द्र कुमार
योग मन को नियंत्रित करने, स्मरण शक्ति बढ़ाने तथा तनाव को दूर करने का प्रभावी, सस्ता एवं सरल माध्यम- प्रो ध्रुव कुमार
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के राष्ट्रीय सेवा योजना कोषांग के द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर “योग प्रशिक्षण शिविर” का आयोजन प्रातः 6:30 बजे से किया गया, जिसका संचालन उद्घाटन, तकनीकी एवं प्रश्नोत्तरी तीन सत्रों में किया गया। शिविर में वित्तीय सलाहकार इन्द्र कुमार, सोशल साइंस के डीन प्रो ध्रुव कुमार, केन्द्रीय पुस्तकालय के प्रभारी प्रो दमन कुमार झा, परीक्षा नियंत्रक डॉ इंसान अली, चिकित्सा पदाधिकारी डॉ गीतेन्द्र ठाकुर, डॉ गजेन्द्र भारद्वाज, योग प्रशिक्षक वीरेन्द्र कुमार सिंह, एनएसएस समन्वयक डॉ आर एन चौरसिया, खेल पदाधिकारी प्रो अमित कुमार झा, सीए सुनील कुमार झा, एनएसएस अधिकारी- डॉ अनुपम प्रिया, डॉ सोनू राम शंकर, प्रो शिव नारायण राय एवं डॉ सुजीत कुमार साफी, सहायक- विश्वनाथ ठाकुर एवं अजितेश नाथ ठाकुर, एनएसएस कर्मी- अमित कुमार झा एवं रवीन्द्र कुमार सिंह, विभिन्न कॉलेजों एवं विभागों के स्वयंसेवक- विवेक कुमार सिंह, विशाल कुमार, जिग्नेश कुमार, अक्षय कुमार झा, अमन कुमार, राम कुमार, समरेश, पवन, विवेक, उज्ज्वल, सुजीत, नंदकिशोर, दयानन्द, आशीष, कुमकुम, मधु, शिवानी, मुस्कान, शुभ लक्ष्मी, राज लक्ष्मी, प्रिशा, श्रुति एवं वेद साई शंकर सहित 110 से अधिक व्यक्ति शामिल हुए ।
शिविर का शुभारंभ करते हुए एफए इन्द्र कुमार ने कहा कि योग मानव जीवन को शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्तर पर संतुलित और निरोग बनाने का सर्वोत्तम साधन है। यह हमें अपनी जड़ों की ओर लौटने तथा प्रकृति से तालमेल बैठने की प्रेरणा देता है। योग को अपनाकर हम आज भी प्राकृतिक जीवन जी सकते हैं। मुख्य वक्ता प्रो ध्रुव कुमार ने कहा कि योग मन को नियंत्रित करने, स्मरणशक्ति बढ़ाने तथा तनाव को दूर करने का प्रभावी, सस्ता एवं सरल माध्यम है। यह भारत का एक सॉफ्ट पावर है, जिसे विदेशी भी तेजी से अपना रहे हैं। आज योग वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य, शान्ति एवं एकजुटता का एक बड़ा आंदोलन बन गया है। डॉ गीतेन्द्र ठाकुर ने कहा कि नियमित रूप से मात्र 30 से 40 मिनट के योगाभ्यास से डायबिटीज, हाई बीपी, मोटापा, जोड़ों के दर्द, पाचन समस्या एवं श्वास रोग आदि में काफी लाभ होता है। यह हमें वृद्धावस्था तक स्वस्थ एवं ऊर्जावान बनाए रखता है। डॉ इंसान अली ने कहा कि योग जाति, धर्म, लिंग, भाषा एवं भौगोलिक सीमा को पार कर पूरी मानवता को एक सूत्र में पिरो रहा है। स्वस्थ जीवन जीने के लिए योग अति आवश्यक है। स्वागत संबोधन में शिविर के संयोजक डॉ आर एन चौरसिया ने कहा कि योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का उत्तम साधन है। यह स्वस्थ तन, शान्त मन और समृद्ध जीवन का आधार है जो हमें आंतरिक शांति एवं ऊर्जा प्रदान करता है। योग को जीवन में अपनाने से शीघ्र और प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होता है।
योग प्रशिक्षक वीरेन्द्र कुमार सिंह ने योग के महत्त्वों को रेखांकित करते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर से ही हम धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष रूपी चार पुरुषार्थों की प्राप्ति कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के माध्यम से भारत की प्राचीन एवं अमूल्य धरोहर योग को वैश्विक पटल पर नई पहचान एवं अति सम्मान मिल रहा है। उन्होंने वज्रासन, पद्मासन, सिद्धासन, भुजंगासन, ताड़ासन, तिर्यक ताड़ासन, कटि चक्रासन, शलभासन, मकरासन, शशांकासन, उष्टासन, शवासान, मंडूकासन, भुजंगासन, पवनमुक्तासन, तितली आसन आदि के लाभों को बताते हुए गहन अभ्यास कराया और बताया कि किस रोग में कौन-सा आसन लाभदायक है तथा किसे किस स्थिति करना चाहिए या कब नहीं करना चाहिए। वहीं भस्त्रिका, कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, ओमकार उच्चारण आदि प्राणायामों का भी अभ्यास कराते हुए उनके महत्वों को बताया। तीसरे सत्र में शिक्षकों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं ने विशेषज्ञों से अनेक तरह के कई प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने संतोषजनक उत्तर दिया। शिविर का प्रारंभ ईश प्रार्थना से हुआ, जबकि समापन शान्ति मंत्र से। डॉ चौरसिया ने संचालन किया, जबकि डॉ सोनू रामशंकर ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

