मुंबई : महाराष्ट्र के मुंबई की पहचान माने जाने वाले डिब्बावाले आज कठिन दौर से गुजर रहे हैं। कभी अपनी सटीक और अनोखी लॉजिस्टिक्स व्यवस्था के लिए दुनियाभर में प्रशंसा पाने वाला यह सिस्टम अब घटते ग्राहकों, वर्क फ्रॉम होम कल्चर और स्विगी-जोमैटो जैसे फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स की चुनौती से जूझ रहा है।
एक समय 4,500 डिब्बावाले रोज़ 50 हजार से अधिक टिफिन पहुंचाते थे, लेकिन अब उनकी संख्या घटकर करीब 1,500 रह गई है। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल ने जिस मॉडल को लॉजिस्टिक्स का मास्टरक्लास बताया था और जिसे देखने प्रिंस चार्ल्स मुंबई आए थे, वही व्यवस्था आज अपने वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रही
आशुतोष झा

