ओडिशा: पुरी के गजपति महाराज दिब्य सिंह देव ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस्कॉन द्वारा शास्त्रों और परंपरा के अनुरूप न होने वाली तिथियों पर जगन्नाथ स्नान यात्रा एवं रथ यात्रा आयोजित किए जाने के मुद्दे पर हस्तक्षेप की मांग की है।
उन्होंने कहा कि यह परंपरा और धार्मिक मर्यादाओं के विपरीत है तथा इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो रही हैं।
गजपति महाराज ने अपने पत्र में कहा कि इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस भारत के बाहर विभिन्न देशों में वर्ष भर अलग-अलग तिथियों पर रथ यात्रा और स्नान यात्रा का आयोजन कर रहा है, जबकि शास्त्रों में इन पर्वों की तिथियां स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं। उन्होंने कहा कि कई शंकराचार्यों और वैष्णवाचार्यों ने भी इस प्रथा की कड़ी आलोचना की है।
उन्होंने बताया कि श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के साथ वर्षों तक चली बातचीत के बाद इस्कॉन की गवर्निंग बॉडी कमीशन के अध्यक्ष ने 19 अक्टूबर 2025 को सूचित किया था कि भारत में रथ यात्रा केवल आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया से शुरू होने वाली नौ दिवसीय अवधि में ही आयोजित की जाएगी।
अलग-अलग डेट पर रथ यात्रा कर रहा आयोजित
हालांकि, विदेशों में इस्कॉन अब भी अलग-अलग तिथियों पर रथ यात्रा आयोजित कर रहा है। गजपति के अनुसार, इस वर्ष विश्व के 70 से अधिक शहरों में शास्त्रसम्मत तिथियों के अलावा अन्य दिनों में रथ यात्रा आयोजित की जा रही है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस्कॉन अध्यक्ष ने 19 अक्टूबर 2025 को यह आश्वासन दिया था कि विश्वभर के सभी इस्कॉन मंदिरों में स्नान यात्रा केवल ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन मनाई जाएगी। इसके बावजूद इस वर्ष भारत के बाहर कम से कम 10 शहरों में यह उत्सव अन्य तिथियों पर आयोजित किया जा रहा है।
गजपति महाराज ने कहा कि स्कंद पुराण, ब्रह्म पुराण और पद्म पुराण सहित अन्य शास्त्रों में स्पष्ट रूप से वर्णित है कि स्नान यात्रा ज्येष्ठ पूर्णिमा को तथा रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया से प्रारंभ होने वाले नौ दिवसीय उत्सव के रूप में संपन्न होती है।
उन्होंने कहा कि पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर सहित भारत और विदेश के जगन्नाथ मंदिरों में अनादिकाल से इन्हीं तिथियों का पालन किया जाता रहा है।
राष्ट्रपति को लिखा लेटर
गजपति महाराज ने दावा किया कि दशकों से इस्कॉन के कई मंदिर इन दोनों पर्वों को अलग-अलग तिथियों पर मनाते आ रहे हैं।
उनके अनुसार, चालू वर्ष में कम से कम 40 इस्कॉन मंदिरों में स्नान यात्रा और 68 से अधिक विदेशी इस्कॉन मंदिरों में रथ यात्रा शास्त्रों द्वारा निर्धारित तिथियों से अलग दिनों में आयोजित की गई है।
उन्होंने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि श्रीजगन्नाथ संस्कृति और परंपरा की रक्षा के लिए इस विषय का सौहार्दपूर्ण समाधान सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएं। पत्रों के साथ संबंधित दस्तावेजों की एक विस्तृत फाइल भी संलग्न की गई है।

