डेस्क:तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त भूचाल आया हुआ है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) के नेतृत्व वाली नई सरकार को विपक्ष के भारी चौतरफा दबाव के आगे झुकना पड़ा है। एक विवादित सरकारी टेंडर जारी होने के महज कुछ ही घंटों के भीतर सरकार ने इसे आनन-फानन में रद्द कर दिया। मुख्य विपक्षी दल द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम (DMK) ने सरकार पर अपने चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुँचाने के लिए ‘कॉन्ट्रैक्ट पॉलिटिक्स’ करने का गंभीर आरोप लगाया है। यह विवाद 19 मई को ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी किए गए एक टेंडर को लेकर है। यह टेंडर कांचीपुरम जिले में 30,000 लीटर की क्षमता वाली एक ओवरहेड पानी की टंकी बनाने के लिए था। 16.83 लाख रुपये के इस कॉन्ट्रैक्ट का टेंडर सुबह 9 बजे जारी किया गया था, और बोली जमा करने की आखिरी तारीख उसी दिन दोपहर 3 बजे तय की गई थी। इस तरह, इच्छुक बोली लगाने वालों को हिस्सा लेने के लिए सिर्फ़ छह घंटे का समय मिला। टेंडर के शेड्यूल के मुताबिक, बोलियां 19 मई को ही शाम 4 बजे खोली जानी थीं।
टेंडर की जानकारी के स्क्रीनशॉट जल्द ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। बोली लगाने के लिए दिए गए इतने कम समय को लेकर सरकार की आलोचना होने लगी, और इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के आरोप भी लगने लगे।
DMK ने ‘सोची-समझी कॉन्ट्रैक्ट पॉलिटिक्स’ का आरोप लगाया
विपक्षी पार्टी ‘द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम’ (DMK) ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि टेंडर की यह प्रक्रिया किसी खास कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए ही तैयार की गई लगती है। DMK के प्रदेश उपाध्यक्ष अमुथरासन ने सवाल उठाया कि कोई भी कंपनी सिर्फ़ छह घंटों के भीतर ‘विस्तृत परियोजना रिपोर्ट’ (DPR) कैसे तैयार कर सकती है और सभी ज़रूरी औपचारिकताओं को कैसे पूरा कर सकती है?

