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पेट्रोल-डीजल बचाने की खातिर… बदलेगा बचे हुए IPL मैचों का शेड्यूल!

डेस्क: IPL 2026 का आगाज 28 मार्च से हुआ. तब से अब तक टीमों ने हवाई रास्ते से और सड़क मार्ग से करीब लाखों किलोमीटर तय कर लिए होंगे. जिस तरह से टीमों का शेड्यूल है और अलग-अलग शहरों में उनके मैच रखे गए हैं, उसे देखते हुए ये ट्रेवल जायज भी है. लेकिन, अब अमेरिका- ईरान युद्ध के असर से हालात जरा बदले-बदले से है और ऐसे में IPL के दौरान हवाई यात्राएं भारत सरकार पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं. उसी समस्या के मद्देनजर दिल्ली और देश में व्यापारियों और उद्यमियों के टॉप संगठन, चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया को एक पत्र लिखा है और मांग की है कि हवाई यात्रा में कटौती करते हुए IPL के बचे हुए मैचों के लिए नया शेड्यूल जारी किया जाए.
बृजेश गोयल ने खेल मंत्री से मांग की कि मुकाबले सीमित मैदानों पर बिना दर्शकों के कराए जाएं. उन्होंने कहा कि कोरोना काल में भी आयोजकों ने सीमित संख्या के मैदानों पर IPL का सफल आयोजन कराया था. उन्होंने कहा कि एक मैच में औसतन 50000 के लगभग दर्शक आते हैं जिससे कि हजारों लीटर पेट्रोल डीजल खर्च होता है. ऐसे में IPL को बिना दर्शकों के कराने से उसकी भी बचत की जा सकती है.

CTI के मुताबिक, IPL टीमों के लिए आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले चार्टर्ड विमान जैसे बोईंग 737 या एअरबस A 320 औसतन लगभग 2400 से 3000 लीटर प्रति घंटा ईंधन खर्च करते हैं. इस हिसाब से अगर फ्लाइट लगभग 2 घंटे उड़ती है तो अनुमानित खपत करीब 5000 से 6000 लीटर एवियशन फ्यूल ATF होती है. उन्होंने कहा कि अगर विमान थोड़ा बड़ा हो या लंबी दूरी के लिए ज्यादा वजन लेकर उड़ रहा हो तो यह आंकड़ा 7000 से 8000 लीटर तक भी जा सकता है. अब ईंधन के इस खर्च को टीमों के करीब 10 हवाई यात्रा से गुना कर दिया जाए तो कह सकते हैं कि हर टीम करीब 50000 से 70000 लीटर एवियशन फ्यूल खर्च कर रही है.
जहां हर एक सरकारी विभाग, राजनेता, अधिकारी, सामान्य नागरिक, प्रधानमंत्री मोदी की सलाह पर फिजूलखर्ची से बचने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं इस मुश्किल वक्त में सिर्फ IPL ही ऐसा आयोजन है जो फिलहाल किसी भी संकट से अछूता नजर आ रहा है. CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि समय की मांग है कि IPL के बचे हुए मैचों का शेड्यूल दोबारा से बनाते हुए उसे सीमित मैदानों पर बिना दर्शकों के आयोजित किया जाए, जिससे लाखों लीटर ईंधन, पेट्रोल डीजल बचेगा और देश पर भार भी कम पड़ेगा.

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