डेस्क: असम विधानसभा चुनाव (Assam Legislative Assembly Elections) 2026 के नतीजों की औपचारिक अधिसूचना (Formal Notification) जारी होने के बाद राज्य में नई सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने आज अपने मंत्रिपरिषद के साथ पद से इस्तीफा दे दिया।
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की ओर से जारी बयान के अनुसार, सरमा ने लोक भवन पहुंचकर राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य (Governor Laxman Prasad Acharya) को अपना और मंत्रिपरिषद का इस्तीफा सौंपा। राज्यपाल ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। हालांकि, नई सरकार के गठन और शपथ ग्रहण तक हिमंत बिस्व सरमा को कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाने का अनुरोध किया गया है।
हिमंत ने बताया कि शपथ ग्रहण समारोह 11 मई के बाद होने की संभावना है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को असम की नई सरकार के गठन का साक्षी बनने के लिए आमंत्रित किया है।
किन-किन को बनाया गया पर्यवेक्षक?
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें जानकारी मिली है कि जेपी नड्डा और नायब सिंह सैनी विधायक दल की बैठक के लिए पर्यवेक्षक बनाए गए हैं। मैं जल्द ही नड्डा जी से बात करूंगा। जैसे ही वे नव निर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाने का निर्देश देंगे, हम बैठक आयोजित करेंगे। विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद ही शपथ ग्रहण समारोह की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी
भाजपा ने हासिल किया बहुमत
असम विधानसभा चुनाव में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। 126 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने अकेले 82 सीटों पर जीत दर्ज कर विपक्ष को करारी शिकस्त दी। यह जीत राज्य में पार्टी के बढ़ते जनाधार और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व पर जनता के भरोसे को दर्शाती है।
वहीं, कांग्रेस को इस चुनाव में निराशा हाथ लगी और पार्टी केवल 19 सीटों पर सिमट गई। क्षेत्रीय दलों में बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) और असम गण परिषद (AGP) ने 10-10 सीटें जीतीं। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) और रायजोर दल को दो-दो सीटों पर सफलता मिली, जबकि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने एक सीट जीतकर अपना खाता खोला।
चुनावी नतीजों के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भारी उत्साह देखा गया। राज्यभर में पार्टी कार्यालयों के बाहर जश्न मनाया गया, मिठाइयां बांटी गईं और आतिशबाजी की गई। पार्टी नेताओं ने इसे विकास, बुनियादी ढांचे, कानून-व्यवस्था और कल्याणकारी योजनाओं पर जनता की मुहर बताया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असम में भाजपा की यह लगातार तीसरी जीत पूर्वोत्तर भारत में पार्टी की मजबूत पकड़ को और मजबूत करेगी। हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में भाजपा ने राज्य में संगठनात्मक मजबूती के साथ विकास और पहचान की राजनीति का संतुलन बनाने की कोशिश की, जिसका फायदा पार्टी को चुनाव में मिला।
अब सबकी नजर भाजपा विधायक दल की बैठक पर टिकी हुई है, जहां औपचारिक रूप से नेता का चुनाव किया जाएगा। माना जा रहा है कि हिमंत बिस्व सरमा को ही एक बार फिर विधायक दल का नेता चुना जाएगा और इसके बाद नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह की तारीख घोषित की जाएगी।

