डेस्क: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में मंडला (Mandla) के विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व (Kanha Tiger Reserve) के सरही परिक्षेत्र में पिछले दिनों एक पूरी बाघिन परिवार (Tigress Family) की मौत हो गई. एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत ने पार्क प्रबंधन के साथ-साथ वन्य प्राणी प्रेमियों और विशेषज्ञों को भी चिंता में डाल दिया था. अब इस मामले में उनकी मौत के कारणों का खुलासा हुआ है.
कान्हा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रविंद्र मणि त्रिपाठी के मुताबिक बाघों के जो सैंपल वेटरिनरी साइंस कॉलेज जबलपुर भेजे गए थे. उसके मुताबिक बाघों में केनाइन डिस्टेंपर नमक संक्रामक वायरस पाया गया है. इसे ही बाघिन और उसके चारों शावकों की मौत का कारण बताया जा रहा है.
इस वायरस से भूख नहीं लगती और निमोनिया हो जाता है. बाघिन के शावकों में भी यह देखा गया था कि वह काफी दिनों से भूखे थे उनके पेट में खाने की कोई चीज नहीं पाई गई थी. एक के बाद एक तीन शावकों की मौत के बाद बाघिन और उसके एक और शावक को इलाज के लिए मुक्की भेजा गया था, लेकिन इलाज के दौरान पहले बाघिन की मौत हुई और उसी दिन शाम को उसके शावक की भी मृत्यु हो गई थी.
केनाइन डिस्टेंपर वायरस के ही मौत होने की बात के सामने आने के बाद पार्क प्रबंधन ने सुरक्षा के कई उपाय किए हैं. बताया जा रहा है कि जहां से बाघ शावकों के शव प्राप्त हुए थे उन जगहों को वैज्ञानिकों द्वारा बताए गए तरीके से डिसइनफेक्ट कर बैरिकेडिंग कर दी गई है. घटनास्थल के आसपास के 5 किलोमीटर के दायरे की कड़ी मॉनिटरिंग की जा रही है.
हाथी दलों को भी मोनिटरिंग के लिए लगाया गया है ताकि कोई जानवर उसे क्षेत्र में ना जा सके. बताया जा रहा है कि यह वायरस कुत्तों के जरिए वन्य प्राणियों में पहुंचा है. कुत्तों को राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में रोकने की कोशिश की जा रही है लेकिन कई बार बाग भी क्षेत्र छोड़कर शिकार के लिए बाहर चले जाते हैं.
ऐसे में संभावना है कि उनके शिकार पर कुत्तों ने हमला किया हो और उनसे वह वायरस शिकार पर आया हो जिसे खाने के बाद यह वाइरस बाघ में पहुंच गया हो. भविष्य में इन संभावनाओं को खत्म करने के लिए आसपास के गांव के मवेशियों का टीकाकरण किया जा रहा है.

