डेस्क: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) में भाजपा (BJP) की शानदार जीत के बावजूद निकट भविष्य में नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की संभावना नहीं दिख रही है। वर्तमान में 244 सदस्यों वाले उच्च सदन में एनडीए के पास भाजपा के 113 सदस्यों सहित कुल 149 सांसद हैं, जो दो-तिहाई बहुमत (163) के आंकड़े से अभी भी 14 सदस्य कम है। राज्यसभा में पश्चिम बंगाल की छह सीटें अगस्त 2029 में रिक्त होने वाली हैं। इनमें से पांच सीटें अभी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पास हैं। ऐसे में भाजपा की राज्य में मजबूत प्रदर्शन के बावजूद एनडीए को दो-तिहाई बहुमत तक पहुंचने के लिए अन्य राज्यों में भी बड़े पैमाने पर सफलता हासिल करनी होगी।
राज्यसभा चुनावों का कार्यक्रम इस प्रकार है…
अगस्त 2029: पश्चिम बंगाल की 6 सीटें खाली होंगी, जिनमें से 5 पर अभी तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है
जून 2026: 22 सीटों के लिए चुनाव
नवंबर 2026: 11 सीटों के लिए चुनाव, जिसमें उत्तर प्रदेश की 10 सीटें शामिल हैं (भाजपा के पास वर्तमान में 8)
जुलाई 2028: उत्तर प्रदेश की शेष 11 सीटें (भाजपा के पास 8)
अप्रैल 2028: 13 सीटें
जून 2028: 21 सीटें, जिसमें पंजाब (5), केरल (3), असम (2), मध्य प्रदेश (3), आंध्र प्रदेश (4), तमिलनाडु (6), कर्नाटक (4), तेलंगाना (2) और छत्तीसगढ़ (2) शामिल हैं
जुलाई 2028: कुल 38 सीटें, जिसमें बिहार (5), महाराष्ट्र (6), ओडिशा (3), राजस्थान (4), पंजाब (2), राजस्थान (2) और उत्तराखंड (1) शामिल हैं
आप से बीजेपी में आए 7 सांसद
बता दें कि कुछ दिन पहले ही में राज्यसभा में भाजपा को महत्वपूर्ण बढ़त मिली जब सदन के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी (आप) के सात सांसदों के भाजपा में विलय को मंजूरी दे दी। इस विलय के साथ ही भाजपा की सदस्यों की संख्या 113 हो गई।
राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत से क्या फायदा?
बता दें कि एक बार एनडीए को राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत मिल जाने पर संवैधानिक संशोधनों वाले महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करना आसान हो जाएगा। वर्तमान में लोकसभा में साधारण बहुमत होने के बावजूद एनडीए के पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है। निचले सदन में दो-तिहाई बहुमत के लिए 363 सांसदों का समर्थन जरूरी है।ॉॉ

