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एक गाने के लिए कमाल की तैयारी: जब किशोर कुमार ने डैनी डेन्जोंगपा को घर बुलाकर समझी उनकी आवाज

डेस्क: भारतीय सिनेमा (Indian Cinema) के सुनहरे दौर (Golden Era) में कलाकार अपने काम को सिर्फ निभाते नहीं थे, बल्कि उसे जीते थे। इसी जुनून का एक दिलचस्प उदाहरण उस समय सामने आया, जब महान गायक किशोर कुमार (Kishore Kumar) ने एक गीत (Song) को खास बनाने के लिए अनोखा तरीका अपनाया। यह घटना उस फिल्म से जुड़ी है, जिसमें डैनी डेन्जोंगपा (Danny Denzongpa) ने अहम भूमिका निभाई थी।
सत्तर के दशक में आई फिल्म अभी तो जी लें में कई चर्चित कलाकार नजर आए, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ सकी। हालांकि, इसके संगीत ने लोगों का ध्यान जरूर खींचा। फिल्म के एक खास गीत को किशोर कुमार की आवाज में रिकॉर्ड किया जाना था, जो पर्दे पर डैनी पर फिल्माया जाना था।
जब उन्हें यह जानकारी मिली, तो उन्होंने सामान्य तरीके से गाना रिकॉर्ड करने के बजाय कुछ अलग करने का फैसला किया। उन्होंने डैनी डेन्जोंगपा को अपने घर बुलाया। उस समय डैनी इंडस्ट्री में नए थे, इसलिए इतने बड़े कलाकार का बुलावा उनके लिए हैरानी भरा था। मुलाकात के दौरान किशोर कुमार ने उनसे कहा कि वे उनकी आवाज में कुछ गाने सुनना चाहते हैं।
डैनी ने हल्की झिझक के साथ नेपाली और असमिया गीत गाकर सुनाए। उन्होंने अपनी स्वाभाविक शैली में गाया और फिर वहां से लौट गए। उन्हें यह समझ नहीं आया कि आखिर इस पूरी प्रक्रिया का मकसद क्या था। लेकिन असल में यही वह चरण था, जहां एक बड़े कलाकार अपनी तैयारी कर रहा था।
दरअसल, किशोर कुमार उस दौरान डैनी की आवाज के उतार-चढ़ाव, उच्चारण, भाव-भंगिमा और गाते समय उनके हाव-भाव को बारीकी से समझ रहे थे। वे यह जानना चाहते थे कि स्क्रीन पर नजर आने वाले अभिनेता की पर्सनालिटी के साथ उनकी आवाज कैसे मेल खाएगी।
इसके बाद उन्होंने अलग-अलग लोकधुनों और क्षेत्रीय गीतों को सुना और उसी आधार पर अपनी गायकी में बदलाव किया। जब उन्होंने फिल्म के लिए गीत रिकॉर्ड किया, तो उसमें एक अलग ही टोन और स्टाइल नजर आया। पर्दे पर जब डैनी डेन्जोंगपा उस गाने पर अभिनय करते दिखाई दिए, तो दर्शकों के लिए यह पहचानना मुश्किल हो गया कि आवाज किसी और की है। यही इस प्रयोग की सबसे बड़ी सफलता थी।

यह किस्सा दर्शाता है कि एक बेहतरीन कलाकार अपने काम को कितना गंभीरता से लेता है। किशोर कुमार ने यह साबित किया कि केवल अच्छी आवाज ही काफी नहीं होती, बल्कि उस आवाज को किरदार के अनुरूप ढालना ही असली कला है। यही वजह है कि उनके गाए गीत आज भी उतने ही ताजगी भरे और प्रभावशाली लगते हैं, जितने अपने समय में थे।

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