अंतरराष्ट्रीय

ईरान और अमेरिका के बीच क्यों हो रही है सीजफायर वार्ता में देरी, सामने आई वजह

डेस्क: मुज्तबा खामेनेई को उनके पिता की हत्या के बाद ईरान का नया सर्वोच्च नेता घोषित हुए काफी समय बीत गया है। इस बीच अभी तक ईरानियों ने ना तो देखा है और ना ही सीधे तौर पर उनका कोई संबोधन सुना है। ऐसे में अब अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि हत्या की धमकियों के बीच मुज्तबा का सामने ना आना वार्ता में देरी की एक वजह हो सकती हैं।

ट्रंप के शीर्ष सहयोगियों के हवाले से बताया कि व्हाइट हाउस का मानना है कि खामेनेई के सक्रिय फैसला लेने की प्रक्रिया से अनुपस्थित रहने के कारण, मौजूदा ईरानी नेतृत्व में दरारें पड़ गई हैं। नेताओं के बीच अपनी स्थिति को लेकर या तेहरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य से जुड़े फैसलों पर वार्ताकारों को कितनी शक्ति दी जाए, इस पर कोई स्पष्ट सहमति नहीं है।

माना जाता है कि ईरान के पास अब भी अनुमानित 440 किलोग्राम एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है। यही एनरिच्ड यूरेनियम शांति वार्ता में एक बड़ी बाधा बना हुआ है। ट्रंप की टीम का मानना है कि मुज्तबा खामेनेई इस वक्त अपने अधीनस्थों को क्या निर्देश दे रहे हैं इसे बारे में बस अंदाजा ही लगाया जा सकता है। इन सबके बीच एक अधिकारी ने बताया कि अभी भी इस बात की संभावना है कि अमेरिका और ईरान जल्द ही बातचीत की मेज पर लौटेंगे। लेकिन, ऐसा कब और कैसे होगा इस बारे में अभी कुछ भी निश्चित नहीं है।

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप में ईरान प्रोजेक्ट के निदेशक अली वाएज ने बताया कि ऐसा लगता है कि मुज्तबा ऐसी स्थिति में नहीं हैं जहां वो वास्तव में कोई महत्वपूर्ण फैसला ले सकते हैं या वार्ता को बारीकी से नियंत्रित कर सकते हैं। हालांकि, उनका मानना है कि मौजूदा व्यवस्था उनका इस्तेमाल बड़े और मुख्य फैसलों के लिए अंतिम मंजूरी लेने के लिए कर रही है ना कि वार्ता की रणनीतियों के लिए। वाएज ने कहा, ” इस व्यवस्था से मुज्तबा को एक सुरक्षा कवच मिल जाता है जो उनके पिता से विपरीत है। अली खामेनेई नियमित रूप से सामने आते थे और संबोधन देते थे।” उन्होंने यह भी कहा कि मुज्तबा इस प्रक्रिया से नदारद हैं इसलिए उनके नाम पर विचार थोपना ईरानी वार्ताकारों के लिए आलोचना से बचने का एक अच्छा बहाना भी है।

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