अंतरराष्ट्रीय

हथियारों के बाजार का नया खिलाड़ी, 50 साल बाद जापान बेचेगा जंगी सामान

डेस्क: दुनिया में युद्धों ने कई देशों को उजाड़ दिया हैं. जहां ये युद्ध कई देशों में तबाही लेकर आते हैं, वहीं कई देशों के लिए युद्ध ही मुनाफे का सौदा साबित होते हैं. दुनिया की बड़ी ताकतें अमेरिका, रूस, चीन आदि विश्व भर में जारी संघर्षों में अपने हथियार बेचकर मोटा मुनाफा कमाते हैं. अब इस हथियारों के बाजार में एक और खिलाड़ी अपनी जगह बनाने वाला है. जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की कैबिनेट ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद जापान के संविधान में एक बड़ा बदलाव करते हुए, फाइटर जेट समेत खतरनाक हथियारों के एक्सपोर्ट पर लगी रोक हटा दी है.

मंगलवार को एक्स पर एक पोस्ट में बदलावों की ऐलान करते हुए, ताकाइची ने यह नहीं बताया कि जापान अब विदेशों में कौन से हथियार बेचेगा. हालांकि, जापानी अखबारों ने कहा कि इन बदलावों में फाइटर जेट, मिसाइल और जंगी जहाज शामिल होंगे, जिन्हें जापान ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के लिए बनाने पर सहमति जताई है.

ताकाइची ने कहा कि इस बदलाव के साथ, सभी डिफेंस इक्विपमेंट का ट्रांसफर असल में मुमकिन हो जाएगा और कहा कि इक्विपमेंट पाने वाले सिर्फ़ वही देश होंगे जो UN चार्टर के हिसाब से इस्तेमाल करने का वादा करते हैं. ताकाइची ने कहा, “बढ़ते गंभीर सिक्योरिटी माहौल में, कोई भी अकेला देश अब अकेले अपनी शांति और सिक्योरिटी की रक्षा नहीं कर सकता.”

जापान के चुनिची अखबार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इन बदलावों के तहत कम से कम 17 देश जापान में बने हथियार खरीदने के लायक होंगे और कहा कि अगर और देश जापान के साथ बाइलेटरल एग्रीमेंट करते हैं तो यह लिस्ट बढ़ाई जा सकती है. जापान के असाही अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक 1967 में लाए गए और 1976 में लागू किए गए पिछले नियमों के तहत जापानी मिलिट्री एक्सपोर्ट सिर्फ नॉन-लीथल हथियारों तक ही सीमित था, जैसे कि सर्विलांस और माइन स्वीपिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले हथियार.

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