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गुस्साई ममता बनर्जी ने रद्द की बैठक, कालीघाट का गुस्सा अब दिल्ली की मेज पर दिखेगा!

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मिली ऐतिहासिक हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर लगी आग अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी है और इसके लपटें अब कोलकाता नगर निगम (KMC) तक पहुंच गई हैं.

पहले विधानसभा में 58 विधायकों का अलग गुट बनना और फिर सबसे मजबूत मुस्लिम चेहरा माने जाने वाले फिरहाद हकीम का कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा देना टीएमसी के लिए बड़ा झटका था. लेकिन रविवार, 7 जून 2026 को जो कुछ भी हुआ, उसने टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है. जमीनी स्तर के जनप्रतिनिधियों यानी नगर निगम के पार्षदों (Councillors) ने भी अब ममता बनर्जी के खिलाफ खुली बगावत का बिगुल फूंक दिया है.

 

कोलकाता के कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के निजी आवास पर आज रविवार को टीएमसी के पार्षदों की एक बेहद महत्वपूर्ण और आपातकालीन समीक्षा बैठक बुलाई गई थी. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद कोलकाता नगर निगम के भीतर मची खलबली को शांत करना और पार्षदों को एकजुट रखना था. लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि अधिकांश पार्षदों ने ममता बनर्जी से मिलने और इस बैठक में शामिल होने से साफ इनकार (Refuse) कर दिया. अपनी ही पार्टी के पार्षदों द्वारा इस तरह नजरअंदाज किए जाने और खुली नाफरमानी से ममता बनर्जी गुस्से से लाल हो गईं. उन्होंने भारी नाराजगी और आक्रोश में आकर इस बैठक को तुरंत रद्द कर दिया.

 

इस घोर अपमान और सांगठनिक नाकामी के बाद ममता बनर्जी ने कोलकाता में रुककर डैमेज कंट्रोल करने के बजाय सीधे दिल्ली का रुख करने का फैसला किया. वे कोलकाता एयरपोर्ट से सीधे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए रवाना (Left for Delhi) हो चुकी हैं, जहां सोमवार, 8 जून को विपक्षी ‘इंडिया’ (I.N.D.I.A.) गठबंधन की एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल बैठक होने जा रही है.

 

कालीघाट का गुस्सा अब दिल्ली की मेज पर दिखेगा

 

बैठक का समय और महत्व: दिल्ली में कल होने वाली ‘इंडिया’ गठबंधन की इस महाबैठक में पांच राज्यों के चुनाव नतीजों के बाद विपक्ष की भावी रणनीति तय की जाएगी.

 

अभिषेक बनर्जी पहले से मौजूद: ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पहले से ही दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं. अब ममता बनर्जी भी वहां पहुंच रही हैं, जिससे यह साफ है कि दोनों नेता दिल्ली में रहकर ही बंगाल के इस सबसे बड़े संकट का हल निकालने की कोशिश करेंगे.

 

बगावत पर आमादा हैं टीएमसी के पार्षद

 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधायकों के बाद पार्षदों का इस तरह दीदी से मुंह मोड़ लेना यह दिखाता है कि तृणमूल कांग्रेस का बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है.

 

कोलकाता में मौजूद एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा- “फिरहाद हकीम केवल कोलकाता के मेयर नहीं थे, बल्कि वे स्थानीय पार्षदों और जमीनी कैडर के सबसे बड़े मसीहा थे. उनके इस्तीफे के बाद पार्षदों को अपना राजनीतिक भविष्य पूरी तरह अंधकार में नजर आ रहा है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की नई भाजपा सरकार ने कोलकाता नगर निगम के खिलाफ जिस तरह का आक्रामक रुख अपनाया है, उससे पार्षदों को डर है कि कहीं उनका वार्ड फंड और राजनीतिक अस्तित्व ही समाप्त न हो जाए. यही कारण है कि वे अब ममता बनर्जी के बजाय बागी गुट या सत्तापक्ष के संपर्क में आ रहे हैं.”

 

ममता बनर्जी इस समय अपने जीवन के सबसे कठिन और अकेले दौर से गुजर रही हैं. कोलकाता के रानी रासमणि एवेन्यू में संविधान की प्रति लेकर धरना देने वाली दीदी अब अपनी ही पार्टी के भीतर अलग-थलग पड़ चुकी हैं. दिल्ली में ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक उनके लिए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रासंगिकता बचाए रखने की आखिरी उम्मीद है. लेकिन सवाल यह उठता है कि जब घर का चूल्हा ही बिखर रहा हो, तो दिल्ली की चौखट पर बैठकर ममता बनर्जी विपक्ष को क्या दिशा दे पाएंगी? बंगाल की राजनीति अब पूरी तरह से एक नए और अप्रत्याशित युग की ओर बढ़ चुकी है.

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