डेस्क:लोकसभा में शुक्रवार को घटा घटनाक्रम भारतीय लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मोड़ के रूप में दर्ज किया जाएगा। मोदी सरकार द्वारा लाया गया संविधान संशोधन विधेयक, जो परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दों को जोड़ता था, अंततः लोक सभा में गिर गया। यह सिर्फ एक सामान्य विधायी हार नहीं, बल्कि एक मील का पत्थर इसलिए भी है क्योंकि वर्ष 2014 में सत्ता में आने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के किसी विधेयक को पहली बार संसद में वोटिंग के दौरान पराजय का सामना करना पड़ा है। इससे पहले भूमि अधिग्रहण कानून और कृषि कानूनों जैसे मुद्दों पर सरकार को चुनौतियां जरूर मिली थीं, लेकिन वह परिस्थितियां अलग थीं और इस तरह सीधे सदन में वोट के जरिए पराजय नहीं हुई थी। हम आपको बता दें कि वोटिंग से पहले ही माहौल गरम हो चुका था। सत्ता पक्ष और विपक्ष के कुछ नेताओं के बीच पर्दे के पीछे गहन बातचीत चल रही थी। शीर्ष नेताओं की लगातार बैठकें हो रही थीं और सदन के भीतर जोरदार विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिला। विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषण को लेकर सत्ता पक्ष की तीखी प्रतिक्रिया ने माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया। हालांकि शाम को जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बोलने के लिए खड़े हुए, तब तक यह लगभग स्पष्ट हो चुका था कि विधेयक का क्या हश्र होने वाला है, लेकिन सरकार इसे वोटिंग तक ले जाने के लिए दृढ़ नजर आई।

