डेस्क: लोकसभा (Lok Sabha) में महिला आरक्षण (women’s reservation) से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पास नहीं हो पाया, लेकिन इसके साथ आए दो अन्य अहम बिलों को लेकर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
दरअसल, महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के गिरने के बाद सरकार ने उससे जुड़े बाकी दोनों विधेयकों—परिसीमन विधेयक 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक 2026—को आगे नहीं बढ़ाया।
क्यों नहीं पेश हुए बाकी बिल?
सरकार का साफ कहना है कि जब मुख्य विधेयक ही पास नहीं हो पाया, तो उससे जुड़े अन्य विधेयकों को आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। यही वजह रही कि इन दोनों बिलों पर चर्चा और मतदान टाल दिया गया।
क्या था इन बिलों का मकसद?
परिसीमन विधेयक, 2026: सीटों के पुनर्गठन (Delimitation) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से जुड़ा था, जो महिला आरक्षण लागू करने के लिए अहम माना जा रहा था।
संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026: दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में महिला आरक्षण लागू करने के लिए जरूरी प्रावधान करता।
मुख्य विधेयक क्यों गिरा?
‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, 2026’ को पास करने के लिए दो-तिहाई बहुमत (352 वोट) की जरूरत थी, लेकिन इसके पक्ष में सिर्फ 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने विरोध किया। कुल 528 सांसदों ने मतदान में हिस्सा लिया और विधेयक 54 वोट से पीछे रह गया।
अब आगे क्या?
फिलहाल सरकार ने इन विधेयकों को होल्ड पर रख दिया है। यानी महिला आरक्षण का मुद्दा फिलहाल संसद में आगे नहीं बढ़ेगा, जब तक इस पर राजनीतिक सहमति नहीं बनती।
महिला आरक्षण विधेयक का गिरना सिर्फ एक बिल की हार नहीं, बल्कि उससे जुड़े पूरे विधायी पैकेज के ठहर जाने जैसा है। अब यह मुद्दा फिर से कब और कैसे संसद में आएगा—यह पूरी तरह राजनीतिक सहमति पर निर्भर करेगा।

