डेस्क: 1 अप्रैल से लागू हुए नए लेबर कोड के तहत सरकार द्वारा किए बदलाव के बाद इस महीने से आपकी सैलरी में कम आ सकती है। दरअसल, अब नए नियम के अनुसार, कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) कुल सैलरी का कम से कम 50% होना जरूरी होगा, जबकि बाकी हिस्सा अलाउंस के रूप में दिया जाएगा।
क्या है नया नियम?
नए नियम के मुताबिक, किसी भी कर्मचारी की Basic Pay और महंगाई भत्ता (DA) उसकी कुल CTC (Total Salary) का कम से कम 50% होना चाहिए। बाकी बचे 50% हिस्से में ही अन्य भत्ते (Allowances जैसे HRA, Travel आदि) शामिल किए जा सकेंगे। यह नियम केवल उन कर्मचारियों पर लागू होगा जिनकी बेसिक सैलरी 15,000 रुपये से अधिक है। जिनकी बेसिक सैलरी इससे कम है, उनकी इन-हैंड सैलरी में कोई बदलाव नहीं होगा।
50,000 रुपये की सैलरी का पूरा कैलकुलेशन
विवरण पुराना स्ट्रक्चर नया स्ट्रक्चर (लेबर कोड के बाद)
कुल सैलरी ₹50,000 ₹50,000
बेसिक सैलरी ₹20,000 (40%) ₹25,000 (50%)
अन्य भत्ते ₹30,000 ₹25,000
PF कटौती (12%) ₹2,400 ₹3,000
इन-हैंड सैलरी ₹47,600 ₹47,000
बदलाव का असर: आपकी इन-हैंड सैलरी में हर महीने 600 रुपये की कमी आएगी, क्योंकि आपका पीएफ (PF) कंट्रीब्यूशन बढ़ जाएगा।
कर्मचारियों को फायदा होगा या नुकसान
हालांकि आपकी जेब में आने वाले पैसे थोड़े कम होंगे, लेकिन इसके लॉन्ग-टर्म फायदे बड़े हैं जैसे कि… पीएफ में ज्यादा पैसा कटने का मतलब है कि रिटायरमेंट के समय आपको एक मोटी रकम मिलेगी। पीएफ पर मिलने वाला सालाना ब्याज अब बढ़ी हुई राशि पर लगेगा। ग्रेच्युटी की गणना बेसिक सैलरी पर होती है, इसलिए बेसिक बढ़ने से आपकी ग्रेच्युटी की रकम भी काफी बढ़ जाएगी। कंपनियां अब अलाउंस के नाम पर बेसिक सैलरी को बहुत कम नहीं रख पाएंगी।

