डेस्क: दुनिया में रक्षा तकनीक तेजी से बदल रही है और इसी रेस में अब छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों (Fighter jets) पर सबसे ज्यादा फोकस किया जा रहा है। इसी दिशा में अमेरिका (America) ने अपना नया एडवांस फाइटर जेट Boeing F-47 विकसित करने का बड़ा फैसला लिया है, जिसे भविष्य के हवाई युद्ध का गेमचेंजर माना जा रहा है। इस विमान को F-22 Raptor का अगला और ज्यादा एडवांस वर्जन बताया जा रहा है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artifical Intelligence), ऑल-एंगल स्टील्थ और एडैप्टिव इंजन जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल होंगी।
भविष्य के युद्ध का नया मॉडल
F-47 को सिर्फ एक फाइटर जेट नहीं, बल्कि “डिजिटल क्वार्टरबैक” की भूमिका में तैयार किया जा रहा है। यानी यह अकेले नहीं लड़ेगा, बल्कि ड्रोन और नेटवर्क सिस्टम के साथ मिलकर पूरा हवाई युद्ध नियंत्रित करेगा। इस सिस्टम में Collaborative Combat Aircraft (CCA) जैसे मानव रहित ड्रोन भी शामिल होंगे, जो सेंसर, हथियार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर क्षमता के साथ F-47 का सहयोग करेंगे। इससे कम संख्या में विमान भी अधिक ताकतवर बन जाएंगे।
कीमत ने उड़ाए होश
F-47 की कीमत को लेकर भी बड़ी चर्चा है। अनुमान के मुताबिक इसकी प्रति यूनिट लागत करीब 300 मिलियन डॉलर (लगभग 3000 करोड़ रुपये) हो सकती है। यह कीमत मौजूदा F-35 Lightning II से लगभग तीन गुना ज्यादा है। तुलना करें तो इस एक विमान की कीमत में भारत के HAL Tejas के करीब 4 से 5 लड़ाकू विमान खरीदे जा सकते हैं।
प्रोजेक्ट पर भारी निवेश और दबाव
इस प्रोजेक्ट के इंजीनियरिंग और डेवलपमेंट पर ही अरबों डॉलर खर्च किए जा रहे हैं। अमेरिकी वायुसेना ने इसे अपनी भविष्य की रणनीति का अहम हिस्सा बताया है और 2027 के बजट में इसके लिए अतिरिक्त फंडिंग की मांग भी रखी है। हालांकि विशेषज्ञों को चिंता है कि कहीं यह प्रोजेक्ट भी बजट कटौती की भेंट न चढ़ जाए, जैसा पहले F-22 प्रोग्राम के साथ हुआ था।
वैश्विक सैन्य प्रतिस्पर्धा में अहम कदम
अमेरिका इस प्रोजेक्ट को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा और चीन के छठी पीढ़ी के फाइटर जेट विकास के जवाब के तौर पर देख रहा है। इस तरह F-47 सिर्फ एक नया विमान नहीं, बल्कि भविष्य के नेटवर्क-सेंट्रिक एयर वॉरफेयर की दिशा तय करने वाला प्लेटफॉर्म माना जा रहा है।

