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सफलता की ऊंचाइयों के बाद भी अधूरी रही ये ख्वाहिश, आशा भोसले की भावुक कहानी

डेस्क: भारतीय संगीत ?(Indian music)जगत की महान हस्ती (Asha Bhosle) के निधन ने पूरे देश को भावुक कर दिया है। 92 वर्ष की आयु में उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल(Breach Candy Hospital) में अंतिम सांस ली। उनके जाने से न सिर्फ बॉलीवुड, बल्कि करोड़ों फैंस के दिलों में खालीपन आ गया है।

रिकॉर्ड्स बनाए, लेकिन एक कमी रह गई

अपने 70+ साल लंबे करियर में आशा ताई ने हजारों गाने गाकर अनगिनत रिकॉर्ड बनाए। हिंदी, मराठी, बंगाली से लेकर कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में गाकर उन्होंने अपनी आवाज का जादू बिखेरा। लेकिन इतनी बड़ी सफलता के बावजूद उनके मन में एक अधूरा सपना हमेशा रहा।

पढ़ाई और अंग्रेजी न सीख पाने का अफसोस

Asha Bhosle को इस बात का जीवनभर अफसोस रहा कि उन्हें पढ़ाई का पूरा मौका नहीं मिला। उन्होंने खुद एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि अगर उन्होंने अच्छी शिक्षा ली होती और अंग्रेजी भाषा सीखी होती, तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बड़ी पहचान बना सकती थीं। उन्होंने बताया था कि जब वे विदेश जाती थीं और अंग्रेजी गाने सुनती थीं, तो उन्हें यह महसूस होता था कि काश वे भी उस स्तर पर गा पातीं।

उस दौर की सोच बनी रुकावट

आशा ताई ने यह भी कहा था कि उनके समय में महिलाओं की शिक्षा को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था। समाज की सोच के कारण उन्हें पढ़ाई का मौका नहीं मिला, जिसका असर उनके करियर के एक हिस्से पर पड़ा।

युवाओं को दिया संदेश

उन्होंने युवाओं को हमेशा यही संदेश दिया कि सफलता के लिए मेहनत और सीखना बेहद जरूरी है। उनका मानना था कि अगर उन्हें सही शिक्षा मिली होती, तो वे और भी ऊंचाइयों तक पहुंच सकती थीं।

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