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मासूम चेहरा, खौफनाक जुर्म… लेडी विलेन 3 साल बाद अरेस्ट, पति को किया था सुसाइड के लिए मजबूर

डेस्क: कानून के हाथ लंबे होते हैं, यह कहावत एक बार फिर सच साबित हुई है. मुरादाबाद पुलिस ने 3 साल से आंख-मिचौली खेल रही उस गुनाहगार पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है, जिसने अपने ही सुहाग को जीते-जी नर्क दिखाया और अंततः उसे मौत को गले लगाने पर मजबूर कर दिया. मुरादाबाद के मझोला थाना क्षेत्र के चर्चित मोनू हत्याकांड (आत्महत्या के लिए उकसाने) की मुख्य आरोपी सोनिया अब जेल की सलाखों के पीछे है.

फरवरी 2023 में पति मोनू की मौत के बाद से ही सोनिया फरार थी. वह अपनी पहचान छिपाकर सहारनपुर के मंडी थाना इलाके के मातागढ़ (पुराना चिलकाना अड्डा) में रह रही थी. उसे लगा था कि वक्त के साथ पुलिस उसे भूल जाएगी, लेकिन मझोला पुलिस की टीम उसकी परछाईं की तरह पीछा कर रही थी. एसआई सतीश कुमार की टीम ने सटीक सूचना के आधार पर सहारनपुर में दबिश दी और सोनिया को उस वक्त दबोच लिया जब वह बेखौफ घूम रही थी.

घटनाक्रम 23 फरवरी 2023 की उस शाम का है, जिसने गांगन वाली मैनाठेर इलाके को दहला दिया था. 35 वर्षीय मोनू ने अपने ही घर में फांसी लगाकर जीवनलीला समाप्त कर ली थी. मोनू की मौत के बाद उसकी मां रामवती ने जो दर्द बयां किया, वह सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं.

मां का आरोप था कि सोनिया ने मोनू को शारीरिक और मानसिक रूप से इस कदर तोड़ा था कि वह अंदर से खत्म हो चुका था. सोनिया अकेले नहीं थी. इस साजिश में पड़ोस में रहने वाले संजय और विनोद भी शामिल थे. इन सबने मिलकर मोनू को प्रताड़ित किया, उसके साथ मारपीट की और उसे जान से मारने की धमकियां दीं.

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सोनिया और उसके साथियों ने मोनू के लिए हर दिन एक नई चुनौती खड़ी कर दी थी. गाली-गलौज और सरेआम अपमान मोनू की जिंदगी का हिस्सा बन चुका था. इसी मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर मोनू ने मौत को गले लगाना ही बेहतर समझा. इस मामले में पुलिस ने धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाने) के तहत मामला दर्ज किया था.

इस मामले में पुलिस पहले ही चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी थी, लेकिन मास्टरमाइंड पत्नी सोनिया पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई थी. 12 अप्रैल 2026 को सोनिया की गिरफ्तारी के बाद उसे मुरादाबाद न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है. यह गिरफ्तारी न केवल मोनू की आत्मा को शांति देगी, बल्कि उस बूढ़ी मां के लिए भी न्याय की किरण है, जिसने अपने जवान बेटे को एक सोची-समझी साजिश के तहत खो दिया था.

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