डेस्क: ग्लोबल टेंशन एक बार फिर हाई पर पहुंच गई है. अमेरिका (US) और ईरान (Iran) में पाकिस्तान (Pakistan) के इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता 21 घंटे की चर्चा के बाद भी बेनतीजा निकली यानी फेल हो गई. इसके बाद ट्रंप एक बार फिर तिलमिलाए नजर आ रहे हैं और उन्होंने नेतृत्व वाले US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ऐलान कर दिया है कि वो ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर रहा है. इन सबके बीच दो हफ्तों के सीजफायर के बाद धड़ाम हुए कच्चे तेल के दाम में एक बार फिर से आग लगी नजर आई है.
सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत एक झटके में 8 फीसदी से ज्यादा उछलकर फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई और दोनों देशों के बीच युद्ध बढ़ने की स्थिति में ये और भी उछल सकती हैं, जो दुनिया में महंगाई का जोखिम बढ़ाने वाली साबित होंगी.
नाकेबंदी का ऐलान, क्रूड में आग
एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामाबाद में हुए US-Iran Talks किसी अंजाम पर नहीं पहुंची. अमेरिकी राष्ट्रपति जेडी वैंस ने इसे ईरान के लिए बेहद खराब बताया, तो ईरान की ओर से अमेरिका पर जमकर पलटवार किया गया. दोनों देशों के बीच अचानक फिर बढ़े तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिली. अमेरिकी की ओर से सोमवार से ईरानी बंदरगाहों (Iranian Ports) की नाकेबंदी शुरू करने के ऐलान के बाद तो इनमें तगड़ा उछाल आया.
WTI Crude Oil Price 8 फीसदी की तेजी के साथ बढ़कर 104.24 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. तो वहीं खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड प्राइस (Brent Crude Oil Price) 7 फीसदी से ज्यादा की उछाल के साथ 102.29 डॉलर हो गया था. नेचुरल गैस की कीमतों (Natural Gas Price) में भी तेजी दर्ज की गई है और ये करीब 2 फीसदी बढ़कर 2.684 डॉलर हो गई है.
ईरान युद्ध (Iran War) के दौरान होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के चलते ब्रेंट क्रूड में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. जो Brent Crude Price युद्ध से ऐन पहले फरवरी के अंत में करीब 70 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करती दिखाई दी थी, वो युद्ध की शुरुआत के बाद बढ़कर 119 डॉलर तक पहुंची. हालांकि, अमेरिका-ईरान में दो हफ्ते के सीजफायर (US-Iran Ceasefire) का ऐलान होने के बाद बीते सप्ताह ये फिर से फिसलीं और जून डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड प्राइस 95 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया था.
Hormuz पर टेंशन चरम पर पहुंची
पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता फेल होने के बाद से ही ईरानी प्रभाव वाले होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर ग्लोबल टेंशन चरम पर पहुंच गई है. ऐसा इसलिए क्योंकि ये समुद्री रूट दुनिया के तेल जरूरत के 20 फीसदी की आवाजाही को कंट्रोल करता है. बीते दिनों इसमें रुकावट का असर तमाम देशों में तेल-गैस संकट (Global Oil Gas Crisis) के रूप में देखने को मिला है.
साफतौर पर समझें, तो दुनिया में व्यापार किए जाने वाले कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा हर दिन होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है. सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और ईरान, ये सभी तेल के प्रमुख निर्यातक हैं. सीजफायर के ऐलान के बाद अब तक इस तेल रूट में जहाजों की आवाजाही हालांकि सीमित ही रही है. मरीन ट्रैकर बताते हैं कि इस अवधि में अब तक 40 से ज्यादा कमर्शियल जहाज इस रूट से गुजरे हैं.
अब क्या करने वाले हैं ट्रंप?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि नाकेबंदी ईरानी पोर्ट्स और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश करने या वहां से निकलने वाले सभी देशों के जहाजों पर निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी. हालांकि, वह अभी भी उन जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की परमिशन देगा, जो गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा कर रहे हैं.
इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता फेल होने के बाद वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत विफल होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ईरान के खिलाफ फिर से भीषण बमबारी ऑपरेशन शुरू करने पर विचार कर रहे हैं.

