डेस्क: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी संघर्ष के बीच वैश्विक तनाव और बढ़ गया है। इस बीच ब्रिटेन (Britain) ने रूस (Russia) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि रूसी पनडुब्बियों ने यूरोप की समुद्री केबलों और पाइपलाइनों (Submarine cables and pipelines) को निशाना बनाने की कोशिश की। ब्रिटेन का दावा है कि इस खतरे को नार्वे के साथ मिलकर चलाए गए संयुक्त सैन्य अभियान में नाकाम कर दिया गया।
ब्रिटेन का आरोप: लंबे समय से चल रही गतिविधि
ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने कहा कि यह कोई अचानक घटना नहीं थी, बल्कि रूस की ओर से लंबे समय से ऐसी गतिविधियां की जा रही थीं। उनके अनुसार इस अभियान में युद्धपोत, विमान और पनडुब्बियों की तैनाती शामिल थी, जिन्हें ब्रिटिश और सहयोगी सेनाओं की निगरानी के बाद पीछे हटना पड़ा।
रूस को कड़ी चेतावनी
ब्रिटिश रक्षा मंत्री ने इस कथित कार्रवाई को गंभीर सुरक्षा खतरा बताते हुए रूस को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि समुद्र के भीतर बुनियादी ढांचे के पास किसी भी तरह की गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसके गंभीर परिणाम होंगे।
ब्रिटेन का दावा: निगरानी से विफल हुआ मिशन
ब्रिटिश पक्ष के अनुसार, रॉयल नेवी ने सीधे टकराव के बजाय निगरानी और खुफिया ऑपरेशन के जरिए रूसी गतिविधियों को उजागर किया। दावा किया गया कि जैसे ही रूस की गतिविधियों का पता चला, उनका मिशन असफल हो गया और वे क्षेत्र से वापस लौट गए।
महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर खतरे का दावा
ब्रिटेन ने कहा कि समुद्र के भीतर मौजूद केबल और पाइपलाइन वैश्विक संचार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम हैं। दावा है कि दुनिया का बड़ा हिस्सा डेटा ट्रैफिक इन्हीं केबलों के जरिए गुजरता है, इसलिए इन पर किसी भी तरह का हमला गंभीर वैश्विक असर डाल सकता है।
इस पूरे मामले पर अब तक रूस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। क्रेमलिन की चुप्पी के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस विवाद को लेकर और सवाल खड़े हो रहे हैं।
नाटो और वैश्विक राजनीति के बीच बढ़ता तनाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब नाटो देशों और रूस के बीच पहले से ही तनाव बना हुआ है। वहीं पश्चिम एशिया संकट के बीच वैश्विक कूटनीतिक समीकरण और अधिक जटिल होते जा रहे हैं, जिस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
