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‘अमेरिका को लगा था तीन दिन में जंग जीत लेंगे’, ईरान के नेता ने बताया कहां फेल हो गए ट्रंप

डेस्क: ईरान के खिलाफ दो हफ्ते के युद्धविराम के एलान के बाद पश्चिम एशिया तनाव का कूटनीतिक हल निकलने की संभावना बढ़ गई है। वहीं, अमेरिका-ईरान युद्धविराम पर भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा, ”अमेरिका सोच रहा था कि तीन दिनों के भीतर वे सब कुछ खत्म करके जंग जीत लेंगे। आखिर उन्हें एहसास हुआ कि यह उनकी बहुत बड़ी गलती थी।”

डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि हम यह युद्ध नहीं चाहते थे और इसे ईरान पर थोपा गया था। उन्होंने कहा कि उन्होंने (अमेरिका-इस्राइल) ही ईरान के खिलाफ इस युद्ध की शुरुआत की थी। ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि ने कहा कि उन्होंने ईरान, उसके नागरिकों और घरों पर हमले शुरू कर दिए।

इलाही ने कहा, ”अमेरिका ने ईरान पर दस हजार से अधिक बार हमला किया और अंत में उन्होंने कहा कि वे ईरान की सभ्यता को नष्ट कर देंगे। इसका मतलब है कि वे ईरान और मानवता को नहीं जानते। इस युद्ध और आक्रामकता की शुरुआत से ही सभी ईरानी सड़कों पर उतर आए हैं।”

उन्होंने कहा, ”कल भी, जब उन्हें एहसास हुआ कि अमेरिका हमारे पुलों, हमारी मस्जिदों, हमारे अस्पतालों पर हमला करना चाहता है। ईरानी इन स्थानों पर एकत्र हुए। ईरानियों ने कहा कि हम अपनी सुविधाओं और अपने बुनियादी ढांचे के साथ मरने के लिए तैयार हैं। आखिरकार उन्हें एहसास हुआ कि वे ऐसा नहीं कर सकते।”

युद्धविराम के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के रुख के बारे में अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा, “यह ईरान के हाथ में है और हम ही तय करेंगे कि क्या करना है। इस युद्ध से पहले होर्मुज जलडमरूमध्य खुला था। किसी को भी होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने में कोई समस्या नहीं थी। सभी इससे खुश थे और इस जलडमरूमध्य से किसी को कोई परेशानी, संकट या संघर्ष नहीं हुआ था।”

ईरान में रहने वाले भारतीयों के बारे में डॉ. इलाही ने कहा, “यह हमारी प्राथमिकता है। यह मेरी प्राथमिकता है। चालीस साल पहले, जब यह युद्ध शुरू हुआ तो मैंने ईरान में अपने लोगों को संदेश भेजा। उनसे तेहरान और अन्य शहरों और विश्वविद्यालयों से लगभग 3,000 छात्रों को लेने का अनुरोध किया, जिनमें से अधिकांश चिकित्सा विज्ञान के छात्र थे।”

उन्होंने कहा, ”मैंने उनके लिए छात्रावास, होटल और आवास किराए पर लिए। मैंने अपने लोगों से उन्हें सुरक्षित स्थान पर लाने को कहा। तेहरान स्थित आपके दूतावास का भी आभारी हूं। सभी छात्र सुरक्षित थे। ईरान में भारतीय भाइयों और बहनों की देखभाल करना हमारी प्राथमिकता है। यह मेरा कर्तव्य है। यह मेरी जिम्मेदारी है।”

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